गुपचुप तरीके से काटकर जंगल में छिपा देते थे खैर, फिर जगाधरी चुन्ना भट्टी में थे बेचते
अमर उजाला ब्यूरो
यमुनानगर। गुपचुप तरीके से खैर को काट पहले थोड़ा-थोड़ा कर जंगल में छिपा देते थे। फिर जब एक गाड़ी में ले जाने लायक हो जाने पर उसे चोरी-छिपे ले जाकर जगाधरी के चुन्नी भट्टी में 3600 रुपये क्विंटल बेच देते थे। यह सब जानकारी खैर तस्करी के मामले में सीआईए-2 की ओर से कुरुक्षेत्र जेल से प्रोडक्शन वारंट पर लाए गए आरोपी ने दी है। इसके दो साथी पहले ही गिरफ्तार किए जा चुके हैं, जबकि इसे सीआईए-2 की टीम ने कोर्ट में पेश कर रिमांड पर लिया है, ताकि पूछताछ में उससे और भी खुलासे हो सकें।
सीआईए-2 इंचार्ज संदीप कुमार ने बताया कि 10 दिसंबर 2016 में बीड़ टापू के जंगल से खैर के 26 पेड़ किसी ने चोरी-छिपे काट लिए थे। तब वन विभाग के रेंज आफिसर सर्वजीत सिंह ने जांच के बाद थाना बुड़िया में सात खैर तस्करों के खिलाफ केस दर्ज कराया था। इनमें से आलमगीर और अब्दुल रहमान को उस वक्त गिरफ्तार कर लिया था, जबकि मामले में गांव चुहड़पुर निवासी इस्लाम फरार चल रहा था। थाने से मामला उनके पास आया। उन्होंने जांच को आगे बढ़ाया तो पता चला कि इस्लाम पर पहले से ही एक केस दर्ज है। वह इन दिनों कुरुक्षेत्र जेल में बंद है। उन्होंने एएसआई नर सिंह और हेड कांस्टेबल रणधीर सिंह को जेल में भेजा, वहां से दो दिन के प्रोडक्शन वारंट पर इस्लाम को यमुनानगर लाया गया। यहां उसे कोर्ट में पेश कर रिमांड पर लिया गया है, ताकि उससे पूछताछ की जा सके। आरोपी इस्लाम ने पूछताछ में बताया कि वह एक साथ कई लोग जंगल में जाते थे और वहां से पेड़ों को काट कर जंगल में ही छिपा देते थे। जब एक गाड़ी भरने लायक लकड़ी हो जाती थी तो उसे ट्रक व अन्य वाहन में भरकर जगाधरी स्थित चुन्ना भट्टी में बेच देते थे। यहां पर करीब 3600 रुपये क्विंटल खैर की लकड़ी बेची जाती थी, क्योंकि यहां पहले खैर की लकड़ी खरीदने का डिपो था, लेकिन अब वह बंद हो गया है।