यमुनानगर। एसकेएम, आंगनबाड़ी, मिड डे मील, आशा वर्कर्स सहित अन्य ट्रेड यूनियनों ने केंद्रीय बजट के विरोध में बुधवार को लघु सचिवालय के सामने प्रदर्शन किया और बजट की प्रतियों को जलाकर विरोध जताया। इस दौरान सभी कर्मियों ने नारेबाजी कर रोष प्रकट किया।
भाकियू (टिकैत) के जिला प्रधान सुभाष गुर्जर ने कहा कि पूरे देश में एसकेएम की ओर से केंद्रित बजट पर विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने इस बजट में किसानों के लिए कुछ नहीं किया बल्कि किसानों को और कर्ज देने की बात की। सरकार चाहती है कि किसान कर्ज में डूबा रहे और वह मजदूरी करने पर मजबूर हो जाए। इसके बाद उनकी जमीनों को व्यावसायिक क्षेत्र के उद्यमियों को बेच दिया जाए। उन्होंने कहा कि सरकार ने बजट में एमएसपी, स्वामीनाथन रिपोर्ट, फसलों के लिए बीज, कीटनाशक दवाइयां व खेती उपकरणों पर कोई कोई बात नहीं कही। इसी तरह से किसानों की आय को बढ़ाने को लेकर भी कोई रोड मैप नहीं बताया गया। यह बजट केवल किसान, मजदूर, गरीब के साथ छलावा है इसके अलावा कुछ भी नहीं। वहीं अखिल भारतीय किसान सभा के संयोजक जनरल सिंह सांगवान ने कहा कि केंद्र सरकार इस बजट में केवल 12 लाख रुपये की आय तक की छूट का झूठा ढिंढोरा पीट रही है। जबकि हकीकत इससे कोसों दूर है। केंद्र सरकार बताए की कुल कितने प्रतिशत लोग हैं, जिनको 12 लाख रुपये तक की आय की छूट का लाभ मिलेगा। बजट में सरकार छूट देने की बजाय छोटे और मझले उद्योगों को कारोबारी टैक्स की छूट दें ताकि व्यापार और रोजगार बढ़े। उन्होंने कहा कि नौ दिसंबर 2021 को प्रधानमंत्री ने किसानों की आय दोगुनी करने की बात कही थी। वहीं स्वामीनाथन रिपोर्ट और एमएसपी एमएम जैसे मुद्दों को लागू करने की भी बात कही थी। लेकिन प्रधानमंत्री वादाखिलाफी कर गए और उन्होंने आमजन के लिए कोई राहत नहीं दी। सीटू की प्रदेश सचिव शरबती ने कहा कि आंगनबाड़ी वर्करों को वेतन भी पूरा नहीं दिया जाता। हमारी मांग है कि हमारा वेतन 26500 रुपये किया जाए। सरकार हमें साल में 10 महीने का वेतन देती है और वो भी देरी से। हमारी मांग है कि हमें पूरा साल का वेतन समय पर दिया जाए।
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