जगाधरी। जिले में चल रहे अमान्य स्कूलों की मनमानी और उस पर शिक्षा विभाग के अधिकारियों की मेहरबानी भी जारी है। अधिकारियों की मेहरबानी के चलते जिले में अमान्य स्कूल धड़ल्ले से चल रहे हैं। यही कारण है कि जिले में अभी तक इन स्कूलों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है। इन स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई तो दूर जिला शिक्षा विभाग अमान्य स्कूलों के नाम तक सार्वजनिक नहीं कर पाया है। जबकि शिक्षा निदेशालय ने नए सत्र के दौरान इन स्कूलों के नाम सार्वजनिक करने के आदेश दिए थे, ताकि लोग अपने बच्चों का दाखिला इन अमान्य स्कूलों में करने से बच सके। परंतु जिला शिक्षा विभाग के अधिकारियों की उदारता के कारण यह अमान्य स्कूल फल-फूल रहे हैं। अभिभावकाें को अंधेरे में रखकर इन स्कूलों ने विद्यार्थियों का दाखिला ले लिया है। इनमें कक्षाएं भी लगाई जा रही हैं। जबकि निदेशालय ने आदेश दिए थे कि इन स्कूलों के नाम सार्वजनिक किए जाएं। हालांकि जिला शिक्षा विभाग ने जिले के अमान्य स्कूलों की सूची बनाई है। जिसमें जिले के सभी खंडों के कुल 47 स्कूलों के नाम शामिल हैं, परंतु इसे सार्वजनिक नहीं किया गया है। विभागीय सूत्रों व जानकारों के अनुसार जिले में अमान्य स्कूलों की संख्या करीब 250 है। इससे विभाग पर उंगुलियां उठने लगी हैं।
लोगों का कहना है कि स्कूलों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से सूची बनाने में पक्षपात किया गया है। वहीं, स्कूलों ने भी इस सूची पर आपत्ति जतानी शुरू कर दी है। कुछ स्कूलों का दावा है कि विभाग की तैयार सूची में जिले के कई ऐसे स्कूल शामिल ही नहीं किए गए हैं जो घर और छोटी-छोटी इमारतों में चल रहे हैं। स्कूलों की आपत्ति जाहिर होने से विभाग में उठा-पटक शुरू हो गई है। इसके बाद अधिकारी एक बार फिर सूची बनाने और इसकी जांच की योजना बना रहे हैं।
बीईओ को दिए आदेश ःअमान्य स्कूलों की सूची पर आपत्ति आने के बाद जिला शिक्षा सदन कार्यालय हरकत में आ गया है। जिला शिक्षा अधिकारी धर्मेंद्र चौधरी ने बताया कि अमान्य स्कूलों की सूची बनाने में कोई पक्षपात नहीं किया गया है। बीईओ की रिपोर्ट पर सूची तैयार की गई है। इसकी दोबारा से जांची जा रही है। इसके लिए सभी खंड शिक्षा अधिकारी को आदेश दिए जा रहे हैं। बीईओ उनके क्षेत्रों में चल रहे स्कूलों की दस्तावेज जांच के बाद सटीक जानकारी देंगे। ऐसे स्कूलों पर कार्रवाई भी की जाएगी।