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Yamuna Nagar News: झमाझम बरसे बादल, सड़कों पर जमा पानी

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एक सप्ताह से रुक-रुक कर हो रही बारिश से शहर की सड़कों पर पानी जमा हो गया। जिस कारण वाहन चालकों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। वहीं बेमौसमी बरसात से किसानों की चिंता बढ़ती जा रही है। पिछले सप्ताह हुई बारिश से जहां पक कर तैयार गेहूं की फसल को नुकसान हुआ, वहीं वीरवार तेज हवा व बारिश की गेहूं के साथ अन्य फसलों पर भी मार पड़ी। मौसम विभाग ने तीन दिन बारिश व आंधी की संभावना जताई है। बारिश का सिलसिला जारी है। वीरवार रात झमाझम बारिश हुई। वहीं शुक्रवार सुबह 11 बजे तक तेज बारिश जारी रही। एक घंटे के लिए बारिश थमी, लेकिन फिर बारिश होने लगी। शुक्रवार पूरा दिन रुक रुक कर बारिश जारी रही। बारिश के साथ चली हवा ने मौसम में ठंडक बढ़ा दी, अचानक हुई ठंड से लोगों को परेशानी हुई। वहीं दूसरी तरफ इस आफत की बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। वहीं, दूसरी ओर मौसम वैज्ञानिक रविवार से मौसम साफ होने की संभावना जताई है। बारिश से अधिकतम तापमान लुढ़क कर 18.4 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। न्यूनतम 13.1 डिग्री दर्ज किया गया। आद्रता 98 फीसदी रही और आठ किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से हवा चली। जबकि रात के समय को करीब 13 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से हवा चली। वहीं दोपहर करीब दो बजे धूप निकली और मौसम साफ होने लगा। लेकिन करीब आधे घंटे बाद फिर मौसम ने करवट ली और तेजी से काले बादल छाने लगे। कुछ देर में फिर से बारिश का मौसम बन गया। बारिश के कारण लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। बारिश के कारण लोग घरों में दुबके रहे। इस दौरान बाजार भी खाली नजर आए। शाम को बारिश थमने पर लोग घरों से निकले, लेकिन ज्यादा देर नहीं रुके। ऐसे में बाजार में दुकानें देरी से खुली और जल्द बंद हो गई।
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बारिश से गलियों व सड़कों पर भरने, सीवरेज ओवरफ्लो की दिक्कतों का लोगों का सामना करना पड़ा। सबसे ज्यादा परेशानी शहर की निचली कॉलोनियों में लोगों को झेलनी पड़ी। इस दौरान पुराना हमीदा, जोडिया, ममीदी, कैंप, गांधी नगर, कुलदीप नगर, विजय नगर, जसवंत कॉलोनी, लाजपत नगर, कांसापुर, बैंक कॉलोनी, सिविल लाइन, रेलवे बाजार, दुर्गा गार्डन सहित अन्य कई कॉलोनियों में सीवरेज ओवरफ्लो के चलते लोगों को परेशानी हुई। जबकि पानी भरने से लोगों को निकलने में मशक्कत करनी पड़ी।

खेतों में गेहूं, सरसों व सहित कई सब्जियों की फसल पक कर तैैयार हो चुकी है। किसान फसल काटने की तैयारी में थे कि बारिश ने उम्मीदों पर पानी फेर दिया। पिछले सप्ताह तूफान के साथ आई तेज बारिश के कारण जिले में सैकड़ों एकड़ गेहूं की फसल खेत में बिछ गई। वहीं वीरवार शाम को तेजी हवा चली और देर शाम बारिश हुई। जिससे फसलों को भारी नुकसान हुआ। इस दौरान खेतों में पानी भर गया। कई क्षेत्र में फसल कटी पड़ी थी, लेकिन पानी भरने से फसल भीग गई। कृषि उप निदेशक डॉ. प्रदीप मिल ने बताया कि यह बारिश गेहूं के कारण नुकसानदायक है। ज्यादा बारिश से खेतों में पानी भर जाएगा और समय पर निकासी न होने से फसल सड़ने लगेगी। इसके अलावा हवा से पौधे गिर जाएंगे। बारिश से गेहूं के अलावा सरसों, सब्जियों व दलहल की फसल को भी नुकसान है। जिले में बारिश से करीब 1200 एकड़ में लगी गेहूं को नुकसान होने की संभावना है। जबकि 300 एकड़ में लगी सब्जियों की फसल प्रभावित होने की आशंका है। अभी तक 162 गांवों के 263 किसानों ने पोर्टल पर फसल खराब होने का मुआवजा देने का आवेदन कर रखा है। कृषि विभाग नुकसान का अनुमान लगा रहा है। पिछले सप्ताह हुई बारिश से करीब 1050 एकड़ की फसल को नुकसान पहुंचा है, जिसे किसानों ने पोर्टल पर अपडेट किया है। कृषि अधिकारियों के अनुसार शनिवार को भी बारि-श की संभावना है।
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जिलेभर में वीरवार रात से शुक्रवार शाम तक सभी खंडों में अच्छी बारिश हुई। जिले में साढ़े सात एमएम से ज्यादा औसतन बारिश हुई। सबसे ज्यादा बारिश जगाधरी खंड में 11 एमएम हुई। जबकि छछरौली में नौ एमएम, प्रतापनगर और बिलासपुर में 8-8 एमएम, रादौर और साढौरा में 7-7 एमएम, सबसे कम बारिश सरस्वतीनगर में कुल तीन एमएम बारिश दर्ज की गई।

मौसम के बार बार करवट लेने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। कुछ दिन पहले तेज हवा के साथ बारिश से जहां किसानों की कड़ी मेहनत से तैयार बिछ गई थी। वहीं वीरवार देर रात से शुक्रवार दिनभर बारिश हुई। बारिश से मौसम में ठंडक बढ़ गई। खेत में खड़ी ही नहीं बल्कि कटी फसल को भी बारिश से नुकसान पहुंचा। किसानों ने बताया कि यह मौसम फसल के लिए अनुकूल नहीं है। पिछले सप्ताह बारिश से काफी फसल खराब हो गई है, वहीं अब फिर बारिश से कटी पड़ी फसल भीगने से खराब हो गई है। उन्होंने बताया कि जो फसल पानी में डूब गई है उसकी गुणवत्ता प्रभावित होगी, जिसे मंडी में बेचने में भी दिक्कत आएगी और इसका भाव भी उन्हें कम मिलेगा। जिस कारण उन्हें प्रति एकड़ हजारों रुपए का आर्थिक नुकसान झेलना पड़ेगा।
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