बारिश थमने के बाद जिले में ठंड का सितम जारी है। चार दिन से लोगों को सूर्य देवता के दर्शन नहीं हुए। जिस कारण धूप नहीं निकल रही। लोग गर्म कपड़ों में भी राहत महसूस नहीं कर रहे हैं। वहीं, दो दिन बाद भी खेतों से बारिश का पानी नहीं निकला है। कई जगह तो खेतों की हालत ऐसे है जहां पर गेहूं की पूरी फसल पानी में डूबी हुई है। किसान खेतों का पानी निकालने में जुटे हैं। किसानों का कहना है कि यदि धूप नहीं निकली तो सरसों, आलू व अन्य फसलों को काफी नुकसान हो जाएगा।
मंगलवार को जिले का अधिकतम तापमान 16 व न्यूनतम 8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। दिनभर आसमान में बादल छाए रहे। पहाड़ों में हो रही बर्फबारी व दो दिन पहले हुई बारिश से आगामी दिनों में न्यूनतम तापमान में दो डिग्री सेल्सियस तक की कमी आने का अनुमान लगाया जा रहा है। तापमान में गिरावट और सर्दी का बढ़ना गेहूं समेत किसी भी फसल के लिए फिलहाल अच्छा नहीं है। वहीं डाक्टर छोटे बच्चों व बुजुर्गों को सर्दी से बचाने की सलाह दे रहे हैं। सिविल सर्जन डॉ. विजय दहिया का कहना है कि बच्चों को घर से बाहर न निकलने दें। उन्हें गर्म कपड़ों में रखें। यदि कोई दिक्कत आए तो तुरंत डाक्टर से चेकअप कराएं।
बारिश के पानी से सबसे ज्यादा सरस्वती नगर क्षेत्र में नुकसान हुआ है। भारतीय किसान यूनयिन के निदेशक मंदीप सिंह रोडछप्पर ने बताया कि गांव पिंजौरा, नगला, गधौला, पाबनी कलां, बाल छप्पर, तलाकौर, सबीलपुर, लंडोरा, कोतरखाना व आसपास के गांवों की सैकड़ों एकड़ फसल बारिश के पानी में डूबी हुई है। इससे किसानों को काफी नुकसान हुआ है। गेहूं की फसल पीली हो गई है। परंतु अब तक सरकार की तरफ से फसलों की गिरदावरी कराने के आदेश नहीं किए गए हैं। किसानों के लिए पहले ही खेती घाटे का सौदा बन गई है और अब प्राकृतिक आपदा ने भी काफी नुकसान पहुंचाया है। इसलिए सरकार जल्द से जल्द गिरदावरी करवा कर किसानों को मुुआवजा दिलाए।
बीडीपीओ सरस्वती नगर राजा राम का कहना है कि सरस्वती नगर खंड के नगला समेत अन्य गांवों का दौरा किया था। कई गांवों के खेतों में बारिश का पानी जमा है। इसे निकालने के लिए सिंचाई विभाग के एसडीओ को कहा है। पानी को खेतों से निकाल कर चेतंग नदी तक ले जाया जाएगा।