रोडवेज बसों में दोनों डोज लगी होने वाले ही यात्रियों को सफर करवाया जा रहा है। यात्रियों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है, वहीं दूसरी तरफ इसका असर यमुनानगर रोडवेज डिपो की रिसीट (आमदनी) पर भी पड़ा है, जोकि पहले से घटकर करीब 11 लाख रुपए पर आ गई है। हालांकि बसों के किलोमीटर ठीक हैं, किंतु महामारी के चलते यात्री भी बसों में यात्रा करने से गुरेज कर रहे हैं। दरअसल आम दिनों में डिपो की आमदनी 13 से 14 लाख रुपए हुआ करती थी, किंतु जब कोरोना के केसों ने रफ्तार पकड़ी तो मुख्यालय ने भी दो डोज लगने वाले यात्री को ही यात्रा करने के निर्देश जारी कर दिए हैं।
हालांकि नई गाइडलाइन के मुताबिक बसों में सफर करने वाले यात्रियों की संख्या कम है। मगर जो यात्री रोडवेज बसों में यात्रा कर रहे, उनकी पहले बस अड्डे पर ही दोनों डोज लगी होने का प्रमाण पत्र चेक करने के लिए दो से तीन कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है तथा चेकिंग के बाद यात्री का नाम, पता और मोबाइल नंबर अड्डे पर ही रखे रजिस्टर में एंट्री दर्ज की जा रही है। यहां बता दें पिछले साल लगे लॉक डाउन के चलते रोडवेज डिपो को काफी घाटा उठाना पड़ा था, जिसकी भरपाई आज तक नहीं हो पाई है। वहीं अब महामारी के बढ़ते केसों के चलते यात्रियों की संख्या फिर से घटने लगी है। इससे दोबारा डिपो का घाटा उठाना पड़ेगा। बता दें यमुनानगर रोडवेज डिपो में 130 बसों में यात्री सफर कर रहे हैं।
दोनों डोज लगी होने वाले व्यक्ति को ही यात्रा करवाई जा रही है। हमनें दोनों डोज लगी होने की जांच के लिए कर्मचारियों की अड्डे पर ही ड्यूटी लगाई गई है तथा रजिस्टर भी रखा गया है ताकि यात्री की इसमें उपस्थिति दर्ज हो सके। वहीं यात्रियों की संख्या घटने से डिपो की रिसीट पर भी इसका असर पड़ रहा है।
-बालक राम, महाप्रबंधक, रोडवेज।