छछरौली। नागल पट्टी गांव में तेंदुए का आतंक बना हुआ है। तेंदुए ने गांव में घुसकर कुत्ते के दो बच्चों को मौत के घाट उतार दिया। ग्रामीण द्वारा तेंदुए को ललकारने के बाद वह पास के खेतों में छिप गया। सूचना मिलने पर वन्य जीव प्राणी विभाग और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। बीते 20 दिनों में यह तीसरा मामला है। जब इस तरह तेंदुए ने आबादी में घुसकर हमला किया है। ग्रामीणों ने वन विभाग पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाकर नाराजगी व्यक्त की है।
ग्रामीण कुर्बान, मेहरबान, इरफान, सादिक, रमजान व रियासत ने बताया कि यह तेंदुआ पिछले 20 दिनों से खिजराबाद क्षेत्र में घूम रहा है, जिसने बीते 15 अप्रैल को खिजराबाद के पास खेत में काम कर रहे किसान पर हमला कर किसान को गंभीर रूप से घायल कर दिया था। किसान पर हमला करने के बाद तेंदुआ खेतों में कहीं छिप गया था, जिसे तलाश करने में वन्य जीव प्राणी विभाग ने 1 दिन और 1 रात सर्च अभियान चलाया। उसके बावजूद भी तेंदुए का कहीं पता नहीं चला। उसके बाद 29 अप्रैल को इस तेंदुए ने खिजरी गांव में भेड़ों के बाड़े में हमला कर भेड़ को मौत के घाट उतारा था। ग्रामीणों का कहना है कि इसी तरह नागल पट्टी गांव में भी तेंदुए ने गांव में घुसकर हमला किया है, जिसमें एक घर में दो कुत्ते के पिल्ले को मौत के घाट उतार दिया। ग्रामीणों का कहना है कि इस तेंदुए के मुंह खून लग गया है। इसी वजह से यह बार-बार आबादी की तरफ लौट कर आ रहा है। इस बात को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इस तेंदुए की वजह से खेतों में काम कर रहे ग्रामीणों और छोटे बच्चों की जान पर बन गई है। यह उन पर किसी भी समय हमला कर सकता है।
ग्रामीण बोले- 20 दिनों से आबादी क्षेत्र में घूम रहा तेंदुआ
ग्रामीणों का कहना है कि यह वन्य जीव प्राणी विभाग की लापरवाही का ही नतीजा है। पिछले 20 दिनों से तेंदुए द्वारा आबादी क्षेत्र में एक के बाद एक हमले हो रहे हैं और वन्य जीव प्राणी विभाग के कर्मचारी इस तेंदुए को एक जगह से दूसरी जगह खदेड़ कर अपनी ड्यूटी पूरी कर लेते हैं और कुछ दिन के बाद तेंदुआ दोबारा आबादी में घुसकर हमला कर देता है। ग्रामीणों की मांग है कि क्षेत्र में घूम रहे इस तेंदुए को पिंजरा लेकर रेस्क्यू कर आबादी से दूर छोड़ा जाए। ताकि तेंदुआ आबादी में ना घुसे और ग्रामीण सुरक्षित रह सके।
क्षेत्र में घूम रहे तेंदुए की सूचना उनको मिली थी। तेंदुए के एक जगह रुकने के दो कारण हो सकते हैं या तो तेंदुए ने वहां पर कोई बड़ा शिकार मारा हुआ है या फिर मादा तेंदुआ है, जिसने वहीं आसपास बच्चे दे रखे हो। इन्हीं दो कारणों से तेंदुआ तीन चार किलोमीटर के दायरे में ही घूमता नजर आता है। इसके बारे में जांच की जा रही है और जल्द ही पिंजरा मंगवा कर तेंदुए को रेस्क्यू करा कर नेशनल पार्क कलेसर में छोड़ दिया जाएगा।
- शिव सिंह रावत, डीएफओ, वन्य जीव प्राणी विभाग