जिले के 13 लाख लोगों के स्वास्थ्य की जिम्मेदारी का बोझ, रोजाना पांच से ज्यादा विडियो कांफ्रेंसिंग के साथ कोरोना महामारी को मात देने में दिनरात जुटे हैं कोरोना वारियर्स कपल। हम बात कर रहे हैं जिले के सिविल सर्जन डॉ. विजय दहिया और उनकी पत्नी डॉ. पूनम चौधरी की, जो बिना रूके बिना थके 15 से ज्यादा घंटे तक काम करते हैं और फिर परिवार भी संभालते हैं। डॉ. पूनम दहिया गॉयनो स्पेशलिस्ट हैं और उनके पास जिले के सबसे बड़े जगाधरी सिविल अस्पताल का प्रभार है। पिछले एक महीने से दोनों परिवार, नाते-रिश्तों की परवाह न करके सिर्फ मरीजों की देखभाल में जुटे हैं। दोनों का कहना है कि वो तो सिर्फ देश और समाज की सेवा में अपना छोटा सा योगदान दे रहे हैं। ये उनके जज्बे का ही नतीजा है कि जिले में अब तक एक भी कोरोना पॉजिटिव नहीं आया है। जबकि करीब 100 लोगों के सैंपलों की रिपोर्ट आ चुकी है।
दूसरों की सेवा में जुटे, अपनों से दूरी बनाई
डॉ. विजय दहिया ने बताया कि बेटा और बेटी दोनों डॉक्टरी की पढ़ाई करते हैं। बेटा अभी पांडिचेरी है। जबकि बेटी घर आई हुई है। दिनभर मरीजों के बीच रहना पड़ रहा है। रोजाना पांच से लेकर 10 तक विडियो कांफ्रेंसिंग या अधिकारियों से मीटिंग में हिस्सा लेना पड़ रहा है। इसके बाद कोरोना की तैयारियों पर नजर और रोजाना समीक्षा करनी पड़ती है। तमाम संदिग्धों की सैंपलिंग से लेकर रिपोर्ट आने तक मॉनिटरिंग और उच्चाधिकारियों को अपडेट करना। इतनी व्यस्तता के बीच खुद के स्वास्थ्य का भी ख्याल रखना पड़ रहा है। इस बीच अपनों के लिए टाइम नहीं निकाल पा रहे। राहत की बात ये है कि हमारी पूरी टीम चाहे उसमें डॉक्टर हो, नर्सिंग स्टाफ हो या फिर मेडिकल स्टाफ सभी पूरी जी जान से जुटे हुए हैं। इसी जज्बे से हम कोरोना से जीत रहे हैं।
समाज को हमारी जरूरत, ये समय भी निकल जाएगा
डॉ. पूनम चौधरी का कहना है कि आज समाज को हमारी जरूरत है। परिवार की चिंता होती है, लेकिन जो मरीज यहां भर्ती हैं उनके प्रति भी हमारी जिम्मेदारी बनती है। समय है यह भी कट ही जाएगा। आज जिले के 13 लाख नागरिकों की नजर स्वास्थ्य विभाग पर है। ऐसे में हमारी जिम्मेदारी और ज्यादा बढ़ जाती है। बच्चे भी मेडिकल लाइन से हैं और उन्हें भी हमारी जिम्मेदारी का अहसास है। उन्हें ये भी पता चल रहा है कि ऐसे हालात में किस तरह से अपना फर्ज पूरा करना है।