संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। विश्वकर्मा चौक यमुनानगर से शहर को सहारनपुर-पंचकूला नेशनल हाईवे-344 से जोड़ने वाली प्रस्तावित सड़क का रास्ता लगभग साफ हो गया है। सरकार की अपील के बाद बड़ी संख्या में किसान जमीन देने के लिए तैयार हो गए हैं। अब एक-दो किसानों से सहमति बनाने के लिए बातचीत चल रही है। इसके बाद सड़क निर्माण की प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद है।
प्रस्तावित सड़क बनने से गांव पांजुपुर में निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेज तक पहुंच आसान हो जाएगी। अभी शहर से मेडिकल कॉलेज जाने के लिए लोगों को लंबा रास्ता तय करना पड़ता है। विश्वकर्मा चौक से जोडि़याें की ओर से मेडिकल कॉलेज पहुंचने में करीब 10 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है। हमीदा हेड की ओर से यह दूरी लगभग पांच से छह किलोमीटर है, लेकिन यह रास्ता पूरी तरह सुरक्षित नहीं माना जाता क्योंकि इसमें नहर की पटरी से होकर गुजरना पड़ता है।
नई सड़क बनने के बाद मेडिकल कॉलेज की दूरी घटकर करीब तीन से चार किलोमीटर रह जाएगी। इससे मरीजों, उनके परिजनों, डॉक्टरों और कर्मचारियों को बड़ी सुविधा मिलेगी। इसके अलावा शहरवासियों को नेशनल हाईवे तक पहुंचने के लिए एक नया विकल्प भी मिलेगा। इससे जोडि़याें और लक्कड़ मंडी क्षेत्र में लगने वाले जाम से भी राहत मिलने की उम्मीद है। सड़क निर्माण के लिए तैयार की गई डीपीआर पहले ही तैयार हो चुकी है। अधिकारियों के अनुसार हाईवे से जोड़ने के लिए करीब आधी एकड़ से एक एकड़ तक जमीन की आवश्यकता होगी। जमीन उपलब्ध होने के बाद निर्माण कार्य शुरू किया जा सकेगा।
1200 करोड़ से बन रहा मेडिकल कॉलेज
गांव पांजुपुर में बन रहा मेडिकल कॉलेज और अस्पताल जिले के लिए बड़ी परियोजना है। करीब 21 एकड़ जमीन में तैयार हो रहे इस मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की 100 सीटें होंगी। इसके साथ ही नर्सिंग कॉलेज भी स्थापित किया जाएगा। अस्पताल में मरीजों के इलाज के लिए 500 बेड की सुविधा उपलब्ध होगी। इस पूरे प्रोजेक्ट पर सरकार करीब 1200 करोड़ रुपये खर्च कर रही है। निर्माण कार्य इसी वर्ष पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
विकास के लिए महत्वपूर्ण परियोजना : विधायक
विधायक, यमुनानगर विधानसभा क्षेत्र के विधायक घनश्याम दास अरोड़ा का कहना है कि विश्वकर्मा चौक से मेडिकल कॉलेज को हाईवे से जोड़ने वाली सड़क शहर के विकास के लिए महत्वपूर्ण परियोजना है। किसानों के सहयोग से जमीन की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। सड़क बनने से मेडिकल कॉलेज तक पहुंच आसान होगी और शहर के लोगों को नेशनल हाईवे से जुड़ने का बेहतर विकल्प मिलेगा।