शहर के जमा कूडे़ को उठा शहर में ही खाली पड़ी जगहों पर डाला जा रहा है।
यह कूड़ा खुद नगर निगम के सफाई कर्मचारी डाल रहे हैं। शहर की विभिन्न
गलियों से ट्रैक्टर-ट्रॉली में कूड़ा इकट्ठा कर कैल में बने वेस्ट
मैनेजमेंट प्लांट में ले जाने के बजाय कर्मचारी आसपास में ही गंदगी डंप कर
रहे हैं।
इसके चलते इन स्थानों पर कूड़े के बड़े-बड़े ढेर लग गए हैं। जिससे
दिक्कत जनता को उठानी पड़ रही है। क्योंकि इन जगहों पर गंदगी के ढेर लग
चुके हैं। इससे पूरे क्षेत्र में दुर्गंध का माहौल है। जगाधरी में गुलाब
नगर चौक के पास गोरीशंकर मंदिर के पीछे खाली पड़ी जगह पर यह खेल चल रहा है,
वहीं यमुनानगर के हमीदा में भी ऐसा ही हो रहा है। हमीदा में कर्मचारी
गंदगी उठाने के बाद पश्चिमी यमुना नहर के किनारे बने जोहड़ में डाल रहे
हैं।
यह जोहड़ पूरा कूड़े से भर गया है, वहीं निगम के अधिकारी भी इस पूरे
मामले से अनजान बने हैं। जगाधरी के सेनेटरी इंस्पेक्टर हरजीत सिंह का कहना
है कि जगाधरी का पूरा कूड़ा प्लांट में जा रहा है। कोई कर्मचारी ऐसा कर रहा
है, तो इसकी जांच की जाएगी। शनिवार को ही मौके पर जाकर देखा जाएगा।
तेल बचाने के चक्कर में चल रहा खेल
सूत्रों
की मानें तो कूड़ा वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट में ले जाने के बजाय शहर में ही
पड़ी खाली जगहों पर डालने के पीछे डीजल बचाने का खेल है। कर्मचारी खुद की
जेब गर्म करने के लिए ट्रॉली में कूड़ा लादकर आसपास की खाली पड़ी जगहाें पर
डाल रहे हैं, जबकि ऐसा करना गलत है। कूड़ा उठाने के बाद उसे प्लांट में ले
जाना होता है। लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। वहीं लोगों का कहना है कि
अधिकारियों की ओर से इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। कर्मचारी जहां
निगम को चुना लगा रहे हैं वहीं लोगों के लिए भी दिक्कतें बढ़ा रहे हैं।
क्योंकि जो कूड़ा खुले स्थानों पर डाला जा रहा है वह लोगों के लिए मुसीबत
बना हुआ है। लोग चाहकर भी कुछ कर नहीं पा रहे हैं।
तो कर्मचारियों की जरूरत ही क्या
शहरवासी
बलवंत सिंह, प्रमोद कुमार, राहुल और अंकुर का कहना है कि अगर गंदगी को
आसपास खाली पड़ी जगहों पर ही डालना है, तो इसमें कर्मचारियों की जरूरत ही
क्या है। यहां पर लोग खुद भी गंदगी डाल सकते हैं। उनका कहना है कि एक तरफ
तो प्रशासन की ओर से सफाई के प्रति लोगों को जागरूक किया जा रहा है, वहीं
दूसरी तरफ निगम के कर्मचारी गंदगी के ढेर लगाने का काम कर रहे हैं। ऐसे
कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। क्योंकि यह तो पर्यावरण को
दूषित करने का काम किया जा रहा है।
इस उद्देश्य से खर्च किए थे 19 करोड़
गांव
कैल में बने वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट शुरू होने से पहले शहर का कूड़ा ऐसे
ही खाली पड़ी जगहों पर डंप किया जाता था। सरकार की ओर से इस उद्देश्य से
प्लांट लगाया गया था कि प्लांट के बाद शहर को कूड़ा प्लांट में आएगा और
सड़कों किनारे और खाली पड़ी जगहों पर कूड़ा डालने से निजात मिलेगी। लेकिन
प्लांट में कूड़ा ले जाने का सिलसिला कुछ दिन ही चल पाया। अब दोबारा से
सफाई कर्मचारी गंदगी को सड़कों किनारे और खाली पड़ी जगहों पर डालने लगे
हैं। इस प्लांट पर करीब 19 करोड़ रुपये खर्च आया था। लेकिन यह प्लांट भी
साल में ज्यादातर बंद ही रहा। इन दिनों भी प्लांट बंद पड़ा है। इस प्लांट
की क्षमता 150 टन की है।