खजूरी रोड पर गांव शादीपुर के पास बनी दुकानों को गिराने गए प्रशासन के
अधिकारियों और लोगों के बीच झड़प हो गई। प्रशासन की ओर से अभी एक गोदाम को
ही तोड़ा गया था।
इसको देखकर दुकानदार भड़क गए और निगम के कर्मचारियों और
अन्य अधिकारियों को जान बचाकर भागना पड़ा। प्रशासन की कार्रवाई से खफा
लोगों ने निगम कर्मचारियों और उनकी गाड़ियों पर पथराव भी किया। मौके पर
पहुंचे ईओ विजय पाल यादव और निगम कर्मचारी सुरेंद्र को हलकी चोटें आईं।
पथराव से अधिकारियों की गाड़ियों को नुकसान पहुंचा। खफा दुकानदारों ने रोड
पर आधा घंटा जाम भी लगाए रखा। मौके पर पहुंचे लोगों के गुस्से को देखते हुए
मौके पर पुलिस बल को बुलाया गया और उच्चाधिकारियों के आश्वासन के बाद
लोगों ने जाम खोला। दुकानदारों का आरोप था कि निगम की ओर से मनमर्जी से
दुकानें गिराने का नोटिस जारी किया गया है। ये दुकानें कई दशकों से यहां पर
बनी हुई हैं।
पुलिस ने ईओ की शिकायत पर अशोक कुमार गुप्ता उसके पुत्र,
इस्लाम और अली नवाज के खिलाफ मारपीट, सरकारी काम में बाधा पहुंचाने और जान
से मारने की धमकी देने का मामला दर्ज कर लिया है। ईओ विजय पाल ने बताया कि
वह अवैध निर्माण को ढहाने के लिए वहां पहुंचे थे। मौके पर पुलिस फोर्स कम
होने की वजह से लोगों ने पथराव कर दिया।
दुकानदार नितिन गुप्ता ने
बताया कि उनका 1978 का गोदाम है। निगम की ओर से पिछले दिनों नक्शा पास
कराने को लेकर नोटिस भेजा गया था। आरोप है कि इसके लिए दो लाख रुपये की
डिमांड की गई। पैसे न देने के चलते शुक्रवार को निगम के अधिकारी जेसीबी
लेकर गोदाम तोड़ने के लिए मौके पर पहुंच गए।
उनका कहना है कि कर्मचारियों
की ओर से उन्हें गोदाम से सामान उठाने का समय भी नहीं दिया, वहीं दुकानदार
सचिन, राजेश और संजीव ने बताया कि निगम की ओर से उन्हें भी नोटिस भेजा गया
है। उनकी दुकान कई साल पुरानी है। उनका कहना है कि रोड पर ज्यादातर दुकानें
निगम के गठन से पहले की हैं। लेकिन अब निगम अधिकारियों की ओर से नक्शा पास
कराने के नाम पर पैसे एेंठने का काम किया जा रहा है।
सुविधाएं नहीं हो ऐसी कार्रवाई क्यों
विरोध
कर रहे दुकानदारों का कहना है कि निगम के गठन के बाद भी यहां पर कोई
सुविधा नहीं दी गई है। सड़क पर गंदा पानी खड़ा रहा है। जिससे दुकानदारी ठप
हो गई है। बारिश के दिनों में तो यहां दुकानों में पानी आ जाता है। उनका
कहना है कि गंदे पानी की निकासी को लेकर नाला बनाने के लिए लोग लंबे समय से
मांग कर रहे हैं, लेकिन अभी तक नाला नहीं बनाया गया है। उनका कहना है कि
जब तक निगम की ओर से यहां पर भी शहर जैसी सुविधाएं नहीं दी जाती, उनकी ओर
से नक्शा पास व अन्य नियम पूरे नहीं किए जाएंगे।
उनका कहना है कि इन
दुकानों के सहारे ही तो हमारी रोजी रोटी चल रही है और निगम की ओर से इन्हें
तोड़ा जा रहा है। उनका कहना है कि पहले निगम की ओर से प्रॉपर्टी टैक्स के
नाम पर लूटा जा रहा। एक तरफ तो सुविधाओं के अभाव के बाद भी उनसे प्रॉपर्टी
टैक्स वसूला जा रहा है वहीं दूसरी और दुकानें तोड़ी जा रही हैं। उन्होंने
चेतावनी देते हुए कहा कि अगर दोबारा से दुकानें तोड़ने की कार्रवाई करने के
लिए अधिकारी क्षेत्र में आए तो उन्हें इसी तरह के विरोध का सामना करना
पड़ेगा।