जगाधरी। जिले के कई स्कूल ऐसे हैं, जिनमें बच्चे डर और हादसे के साये में पढ़ रहे हैं। इन विद्यालयों के भवन जर्जर हो चुके हैं और कभी भी कोई भी हादसा हो सकता है। राजस्थान के झालावाड़ में स्कूल की छत गिरने से सात बच्चों की मौत के बाद अभिभावकों को अपने लाडलों की चिंता सता रही है।
जिले में जर्जर भवन वाले स्कूलों की संख्या करीब 24 है। वहीं छह से ज्यादा स्कूल ऐसे हैं, जिनकी हालात बेहद खराब हैं और कभी भी हादसा हो सकता है। इन स्कूलों में करीब 2500 विद्यार्थी पढ़ते हैं। हालांकि शिक्षा विभाग ने भवन के जर्जर हिस्से का प्रयोग बंद करने के आदेश दिए हैं, लेकिन कुछ स्कूल ऐसे हैं, जिनका भवन छोटा है और सभी कमरों की छतों से बारिश के दौरान पानी टपकता है।
लेंटर सहित दीवारों में दरार आ चुकी है। स्कूलों ने इसके लिए बजट की मांग की है, लेकिन यह फाइल निदेशालय के पास फंसी है। अभी तक निदेशालय की ओर से बजट जारी नहीं किया गया है। जब तक बजट नहीं आता तब तक विद्यालयों के भवनों की मरम्मत व पुनर्निर्माण नहीं हो पाएगा। फिलहाल शिक्षा विभाग ने ऐसे स्कूलों में प्रभारियों के अलावा अध्यापकों को एहतियात बरतने के लिए कहा है।
साफ मौसम में अध्यापक विद्यार्थियों को बाहर बैठा लेते हैं, लेकिन बारिश के दौरान बाहर व अंदर दोनों तरफ खतरा रहता है। इसी तरह खंड छछरौली के गांव जैतपुर स्थित राजकीय विद्यालय का भवन गिरने की कगार पर है। इसकी इमारत इतनी कमजोर हो गई है कि कभी भी यह ढह सकती है। स्कूल स्टाफ की ओर से इस बारे में अधिकारियों को अवगत करवाया है। रोजाना बच्चे जान खतरे में डाल कर अपना भविष्य बनाने आते हैं। संवाद