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Yamuna Nagar News: रटने के बजाए अनुभव से सीख रहे बच्चे

Tue, 06 Jan 2026 01:26 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
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आंख पर पट्टी बांधकर मसालों की पहचान करता बच्चा। विभाग
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संवाद न्यूज एजेंसी
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जगाधरी। शीतकालीन अवकाश में राजकीय विद्यालय की बालवाटिका-3 के बच्चे घर पर ही दक्ष बनेंगे। इसके तहत बालवाटिका-3 के बच्चों के लिए विशेष गृहकार्य तैयार किया है। यह गृहकार्य विशेषज्ञों की ओर से निपुण हरियाणा मिशन के पंच कोस नियमों पर तैयार किया गया है। इसमें बच्चे खेल-खेल सीखेंगे और उनका ज्ञान बढ़ेगा।

इस कार्यक्रम से बच्चे रटने की आदत व पद्धति छोड़ अपने अनुभव से सीखेंगे। बच्चों के लिए रौचक व रचनात्मक शिक्षण कार्यक्रम बनाया गया है, जिससे बच्चे तहत निपुण बनेंगे। बच्चों के इस सर्वांगीण विकास में शिक्षक सहित अभिभावक भी पूर्ण सहयोग दे रहे हैं। शिक्षा विभाग ने इस बार अभिभावकों की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बनाया है।
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इसके लिए शिक्षक प्रतिदिन व्हाट्सएप ग्रुप पर बच्चों के लिए गृहकार्य की गतिविधियां साझा करते हैं और अभिभावक बच्चों के साथ मिलकर यह गतिविधियां पूरा करवा रहे हैं। बच्चे इस रचनात्मक गतिविधियों में खूब रूचि ले रहे हैं। वहीं, अभिभावक भी शिक्षकों के साथ मिलकर बच्चों के विकास के लिए दिलचस्पी दिखा रहे हैं। अभिभावक गतिविधियां करते हुए बच्चों की फोटो व वीडियो शिक्षकों से ग्रुप में साझा कर रहे हैं।
यह कार्यक्रम 15 दिनों की गतिविधियों में बांटा गया है और इसके 100 अंक निर्धारित हैं। मुख्य गतिविधियों में आस-पास के पेड़ों से पांच अलग-अलग पत्तियां इकट्ठी कर उनकी छाप कॉपी में बनाना। चुंबक के साथ खेलना और इसकी प्रतिक्रिया का अनुभव करना। पानी में घुलने और न घुलने वाली वस्तुओं का प्रशिक्षण दिया।
इसके अलावा घर में गोलाकार, त्रिकोणीय और चौकोर आकृतियों की खोज करना। घर के दरवाजों, खिड़कियों के साथ आस-पास के घरों, पेड़ों इत्यादि की गिनती करना शामिल किया गया है। इसके अलावा फिंगर पेंटिंग से चित्र बनाना, माचिस की तीलियों से आकृतियां बनाना और पारिवारिक सदस्यों की नकल करना और उनकी आदतों को जानना और समझना होगा।
वहीं, मौसम के बारे में जानना और इसका प्रभाव की जानकारी लेना। सर्दी में प्रयोग किए जाने वाले कपड़े स्वेटर, मफलर, टोपी इत्यादि के बारे में जानना और पहचान करना, सड़क, पानी व आसमान में चलने वाले वाहनों की पहचान करना इत्यादि गतिविधियां इनमें शामिल हैं।
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पंच कोर्स पर आधारित है गृहकार्य
एफएलएन जिला समन्वयक संजीव सैनी ने बताया कि बच्चों के सर्वांगिण विकास के लिए निपुण हरियाणा मिशन के तहत यह कार्यक्रम तैयार किया गया है। यह कार्यक्रम पंच कोर्स के सिद्धांत पर तैयार किया गया है। यह पंच कोस बच्चों के विकास के लिए आवश्यक हैं। उन्होंने बताया कि पहला अन्न कोर्स है इसमें बच्चों को पौष्टिक भोजन के बारे बताना और उपलब्ध करवाना है, जिससे उनका शारीरिक विकास हो। दूसरा प्राणमय कोर्स है, इसमें बच्चों को खेलों सहित बाहरी गतिविधियां करवाई जाती हैं, जिससे उनका शारीरिक विकास होता है। तीसरा मनोमय कोर्स है, जिसमें बच्चों के मन में भाव व संवेदनाओं का विकास किया जाता है। इसमें परिजनों के साथ अपने की वस्तुएं पेड़-पौधे, पशु-पक्षी इत्यादि के प्रति उनमें भावना उत्पन्न की जाती है, ताकि वे संवेदनशील बनें। चौथे विज्ञानमय कोर्स में बच्चों को भाषण इत्यादि का ज्ञान दिया जाता है। विभिन्न भाषा, शब्द, अर्थ, गणित इत्यादि की जानकारी उपलब्ध करवाना। पांचवां आनंदमय कोर्स है इसमें बच्चों को प्रसन्न रहने के साथ गतिविधियों में आनंद का अनुभव करवाना है।
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