संवाद न्यूज एजेंसी
प्रतापनगर। पहाड़ी की तलहटी में बसे गांव चिक्कन के बच्चों को नदी पार कर शिक्षा ग्रहण करने के लिए जाना पड़ता है। आजकल बरसात का सीजन है, ऐसे में बच्चों को घंटों पानी कम होने का इंतजार नदी किनारे बैठकर करना पड़ता है। जैसे ही पानी कम होता है बच्चे अपने जूते चप्पल उतार कर बडी मुश्किल से नदी पार कर अपने गंतव्य तक पहुंचते हैं।
जब तक छोटे-छोटे बच्चे वापस घर नहीं आ जाते, तब तक परिजनों को उनकी चिंता सताती रहती है। क्योंकि, न जाने कब पहाड़ों से नदी में पानी आ जाए और बच्चे दूसरे किनारे पर बैठने को मजबूर हो जाएं।
गांव चिक्कन स्थित राजकीय माध्यमिक विद्यालय के बच्चों को बरसात के दिनों में पढ़ने के लिए दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। स्कूल में पढ़ाने वाले अध्यापकों को भी नदी पार करके जाना पड़ता है। राजकीय माध्यमिक विद्यालय चिक्कन के स्कूल में 180 बच्चे शिक्षा ग्रहण करते हैं जिनमें केवल एक ही नियमित अध्यापक और एक अध्यापक कौशल रोजगार के तहत बच्चों को पढ़ाने आते हैं। नदी में पानी आने की वजह से अध्यापकों के स्कूल न पहुंच पाने पर बच्चों की छुट्टी भी करनी पड़ती है। बीते कई दिनों से पहाड़ी और मैदानी इलाकों में हुई बरसात से कई बार चिक्कन स्थित पथराला नदी उफान पर आ चुकी है और इससे अध्यापकों का स्कूल पहुंचना मुश्किल हो जाता है।
सरपंच, ग्रामीण व मौजिज लोग इसके लिए कई बार सरकार और प्रशासन से नदी पर पुल बनाने की मांग कर चुके हैं। इस गांव में पहुंचने के लिए नदी पार करने के अलावा अन्य कोई रास्ता नहीं है।
राजकीय माध्यमिक विद्यालय के अध्यापक दया कृष्ण शास्त्री और मोहित ने बताया कि बरसात के चलते नदी में अक्सर पानी आ जाता है। इससे उनको स्कूल पहुंचने में काफी दिक्कत होती है। इसके साथ-साथ चिक्कन स्थित राजकीय माध्यमिक विद्यालय में ऊपर की चिक्कन गांव से भी बच्चे पढ़ने आते हैं जिनको नदी से ही होकर गुजरना पड़ता है।
समस्या की नहीं हुई सुनवाई : सरपंच
इस बारे में गांव के सरपंच रामकुमार ने बताया कि उन्होंने नदी पर पुल बनाने के लिए कई बार स्थानीय अधिकारियों, नेताओं और प्रशासन से गुहार लगाई है, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है। नदी पर पुल न होना गंभीर समस्या है लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।