फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

खतरे में बचपन, इनके लिए नहीं कोई नियम

विज्ञापन
Childhood in danger, no rules for them - फोटो : Yamuna Nagar
विज्ञापन
यमुनानगर। एक ऑटो जिसमें नियमानुसार केवल तीन सवारी को ही बैठाया जा सकता है। शिक्षा विभाग व जिला ट्रांसपोर्ट अधिकारी की उदासीनता के चलते उस ऑटो में दो, तीन, पांच या दस नहीं बल्कि 20 से अधिक विद्यार्थियों को बैठाकर स्कूल से घर और घर से स्कूल ले जाया जा रहा है। ऐसा ही हाल कारों व मैक्सी कैब का है। उनमें भी क्षमता से अधिक विद्यार्थियों को बैठाकर उनकी जान को खतरे में डाला जा रहा है। इन वाहनों में स्कूल से घर तक मासूम बच्चे बिल्कुल भी सुरक्षित नहीं हैं।
विज्ञापन

जिला ट्रांसपोर्ट अधिकारी की टीम रातभर सड़कों पर घूम कर रेत, बजरी से भरे ओवरलोड वाहनों को तो पकड़ती है। दिन के उजाले में सरेआम शहर की सड़कों पर बच्चों को ठूंस-ठूंसकर लेकर जा रहे इन वाहनों पर कार्रवाई करना मुनासिब नहीं समझते।
किसी वाहन पर नहीं लिखा स्कूल वाहन
जो वाहन क्षमता से अधिक बच्चों को लेकर जा रहे हैं उनके ऊपर स्कूल वाहन तक नहीं लिखा है। दरअसल जिन एरिया में स्कूल बसें नहीं जाती वहां से बच्चों को लाने व ले जाने के लिए अभिभावकों ने निजी वाहन लगा रखे हैं। यदि एरिया में बसें जाती हैं तो उनका मासिक किराया इतना ज्यादा है कि आम आदमी उसे वहन नहीं कर सकता। इसलिए कम खर्च पर लोग ऑटो, मैक्सी कैब में बच्चों को स्कूल भेज रह रहे हैं। एक ऑटो में 20 से ज्यादा बच्चों को बैठाना सुनकर ही हैरान कर देता है। छोटे-छोटे बच्चे जो ठीक से बोल भी नहीं पाते वह भी ऑटो ड्राइवर के साथ आगे बैठते हैं। यह हालात किसी एक नहीं बल्कि सभी निजी स्कूलों के हैं। दोपहर को छुट्टी होने से पहले ही यह वाहन स्कूल पर पहुंच जाते हैं। इसके बाद बच्चों को लेकर घर चले जाते हैं।
विज्ञापन

सड़क सुरक्षा की बैठक में स्कूल वाहन पॉलिसी पर खानापूर्ति
हर माह लघु सचिवालय में सड़क सुरक्षा की बैठक होती है। इसी बैठक में सुरक्षित स्कूल वाहन पॉलिसी पर भी चर्चा होती है। परंतु बैठक में डीसी से लेकर पुलिस व जिला ट्रांसपोर्ट अधिकारी कोई भी इस बिंदु को गंभीरता से नहीं लेते। जब इस एजेंडे पर चर्चा होती है तो डीटीओ केवल एक लाइन बोलकर कि गत माह उन्होंने 50-60 स्कूल बसों की जांच की है, कहकर आगे बढ़ जाते हैं। यदि ऐसे वाहनों में बैठे बच्चों के साथ कोई हादसा हो गया तो उसका जिम्मेदारी कौन लेगा। डीटीओ व प्रशासन जिनकी जिम्मेदारी ऐसे वाहनों की जांच करने की है। दूसरा अभिभावकों की जो इन वाहनों में बच्चों को बैठाकर स्कूल भेज रहे हैं।
क्षमता से ज्यादा बच्चे नहीं होने चाहिए : सुशील आर्य
राज्य सड़क सुरक्षा परिषद के सदस्य एडवोकेट सुशील आर्य का कहना है कि वाहन चाहे स्कूल का हो या फिर निजी, उनमें क्षमता से अधिक बच्चे नहीं बैठाए जा सकते। ऐसे वाहन हादसे का कारण बन सकते हैं। इसकी जांच करनी चाहिए। यदि ऑटो व मैक्सी कैब में 20 से ज्यादा बच्चे बिठाए जा रहे हैं तो यह गंभीर मामला है।
ऐसे वाहन बच्चों को नहीं ले जा सकते : सुभाष चंद्र
जिला ट्रांसपोर्ट अधिकारी डॉ. सुभाष चंद्र का कहना है कि ऑटो व मैक्सी कैब बच्चों को स्कूल नहीं ले जा सकते। यह केवल सवारी के लिए बने हैं। गत माह भी ऐसे वाहनों पर कार्रवाई कर चालान किए थे। सोमवार से फिर इनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

Childhood in danger, no rules for them- फोटो : Yamuna Nagar

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें