संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। फायरिंग के बाद नाकाबंदी तक तो ठीक है, लेकिन सही मायने में शहर और एंट्री गेट पर लगाए गए नाके नाम के हैं। ऐसे में कोई भी वारदात को अंजाम देकर आराम से निकल सकता है। दरअसल, नाकों पर तैनात किए गए पुलिसकर्मी पेड़ की छाया में बैठ मोबाइल में व्यस्त दिखेंगे या फिर बूथ के अंदर मिलेंगे। जब कोई वारदात हो जाती है, तब पुलिस कुछ समय तक वाहनों की चेकिंग करते हुए दिखाई देती है।
कन्हैया साहिब चौक पर सुरक्षा की अनदेखी की जा रही है। इस चौक पर सिग्नल लाइट के अलावा बैरिकेड्स और पुलिस बूथ भी बना है। जिस पर इंचार्ज के अलावा होमगार्ड सहित दो से तीन कर्मी तैनात रहते हैं। लेकिन कर्मचारी चौक पर यातायात को कंट्रोल कम और बूथ के अंदर मोबाइल में ज्यादा व्यस्त रहते हैं। यह दृश्य एक दिन का नहीं बल्कि रोजाना दिख जाएगा।
पुलिसकर्मी तभी एक्टिव मोड में होते हैं जब उनके अधिकारियों की गाड़ी यहां से निकलती है। ऐसे में रेड सिग्नल होने के बाद भी वाहन चालक नियमों को तोड़ अपने गंतव्य की तरफ चले जाते हैं। माता आहिल्यबाई होल्कर चौक शहर का सबसे मुख्य चौक है। इस चौक पर भी पुलिस बूथ है। इसके बावजूद यातायात व सुरक्षा रामभरोसे है।
ऐसा नहीं इस चौक पर पुलिसकर्मी नहीं। पुलिसकर्मी ज्यादातर सड़क के किनारे लगे पेड़ों की ठंडी छांव में बैठे मिलते हैं। वहीं इसी तरह कमानी चौक से रादौर रोड की तरफ पेट्रोल पंप के नजदीक बैरिकेड्स लगाकर नाका लगा है। यहां भी दो से तीन पुलिसकर्मियों की तैनात की हुई, लेकिन कर्मचारी अक्सर नदारद मिलते हैं।
पुलिस ने जगह-जगह बैरिकेड लगाकर नाकाबंदी की है, जिससे संदिग्धों की जांच होती रहे। सभी पुलिस कर्मचारियों को पूरी तरह से सतर्क रहने के आदेश हैं। नाकों का औचक निरीक्षण किया जाएगा। लापरवाही मिलने पर संबंधित पुलिसकर्मी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। - सुरेंद्र भौरिया, एसपी, यमुनानगर।