यमुनानगर। एनडीपीएस एक्ट में संदिग्ध आरोपी को क्लीन चिट देने की एवज पर 50 हजार की रिश्वत मांगने के आरोप में एंटी करप्शन ब्यूरो पंचकुला ने सीआईए-1 के सहायक उप निरीक्षक उमेश, मुख्य सिपाही व एक सिपाही पर केस दर्ज किया है।
आरोपियों को रंगे हाथ पकड़ने के लिए ब्यूरो की टीम ने शुक्रवार रात जाल बिछाया। इससे पहले उन्हें भनक लग गई और वे मौके पर नहीं पहुंचे। जिसके बाद एंटी करप्शन ब्यूरो पंचकुला थाने में तीनों पर केस दर्ज किया गया। केस दर्ज होने के बाद पुलिस अधीक्षक सुरेंद्र भौरिया ने तीनों कर्मचारियों का निलंबित कर विभागीय जांच बैठा दी है।
फर्कपुर की खड्ढा कॉलोनी निवासी जुनैद ने ब्यूरो को दी शिकायत में बताया कि नौ अप्रैल को फर्कपुर थाना पुलिस ने उनकी कॉलोनी से सुढैल निवासी रवि और खड्ढा कॉलोनी निवासी सुरजीत को नौ ग्राम स्मैक के साथ गिरफ्तार किया था। तब इसकी जांच फर्कपुर थाने में तैनात सहायक उप निरीक्षक उमेश कुमार को सौंपी गई थी।
जांच अधिकारी उमेश ने उसे थाने बुलाया और कहा कि स्मैक के साथ पकड़े दोनों युवकों ने उसका भी स्मैक प्रकरण में शामिल होना बताया है और साक्ष्य भी दिए। डराते हुए थाना प्रबंधक के नाम पर उससे 10 हजार रुपये ले लिए थे। इसके बाद सहायक उप निरीक्षक उमेश का तबादला सीआईए-1 में हो गया। लेकिन वह मुकदमे की फाइल को उसने अपने पास ही दबाए रहा। जुनैद ने बताया कि कुछ दिन पहले उमेश ने उसे फोन पर कर बताया कि जेल भेजे गए दोनों युवकों ने उसका भी स्मैक प्रकरण में शामिल होना बताया है। यदि बचना है तो 50 हजार रुपये देने होंगे। मना करने पर सीआईए एक में तैनात मुख्य सिपाही विनीत और सिपाही धर्मवीर ने फोन कर उसे धमकाया और 20 हजार रुपये मांगे। इससे परेशान होकर वह पंचकूला में एंटी करप्शन ब्यूरो के पास पहुंच गया।
यहां उसने ब्यूरो के डीएसपी विजय नेहरा को आरोपी उमेश, विनीत व धर्मवीर की ऑडियो कॉल की रिकॉर्डिंग सुनाई और शिकायत दी। डीएसपी विजय नेहरा ने तीनों को रंगे हाथ पकड़ने की योजना बनाई और 20 हजार रुपये देने के लिए आरोपियों को बुलाने को कहा।
योजना के तहत डीएसपी विजय नेहरा अपनी टीम के साथ तीनों को रंगे हाथ पकड़ने यमुनानगर पहुंचे। जुनैद ने आरोपियों को थाने के बाहर पान के खोखे के पास बुलाया। ब्यूरो की टीम अपनी योजना में कामयाब होती, इससे पहले उनकी योजना की सूचना आरोपियों को पता चल गई।