संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। व्यासपुर ब्लॉक के गांव मिल्क खास की महिलाएं स्वरोजगार के जरिए आत्मनिर्भरता बन रही हैं। सोया उत्पादों के निर्माण को आजीविका का साधन बनाकर उन्होंने न केवल अपने परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत की है, बल्कि अन्य महिलाओं के लिए भी रोजगार के नए अवसर पैदा किए हैं।
गांव की रेखा ने जून 2019 में स्वरोजगार की शुरुआत की। इसके बाद अंबाला में एमएसएमई के तहत प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) के अंतर्गत प्रशिक्षण प्राप्त किया। प्रशिक्षण के बाद फरवरी 2022 में एमएसएमई की सहायता से करीब 18 लाख रुपये का ऋण लेकर अपने घर पर सोया उत्पाद निर्माण इकाई स्थापित की।
रेखा की इकाई में वर्तमान में सोया पनीर, सोया दूध, सोया दही, सोया लस्सी, सोया बिस्कुट, सूजी सोया तथा सोया प्रोटीन पाउडर सहित कई उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। इन उत्पादों की गुणवत्ता और पौष्टिकता के कारण स्थानीय बाजारों के अलावा अन्य जिलों से भी मांग बढ़ रही है। व्यासपुर, साढौरा के बाजारों, राष्ट्रीय राजमार्ग के ढाबों तथा विभिन्न दुग्ध उत्पादन केंद्रों तक इनकी नियमित आपूर्ति की जा रही है।
रेखा केवल स्वयं रोजगार तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि उन्होंने गांव की अन्य महिलाओं को भी प्रशिक्षण देकर इस कार्य से जोड़ा। वर्तमान में पांच महिलाएं उत्पादन और विपणन कार्य में उनके साथ जुड़ी हुई हैं। इस पहल से महिलाओं को नियमित आय का स्रोत मिला है और उनका आत्मविश्वास भी बढ़ा है। रेखा ने अप्रैल 2024 में व्यासपुर के पुराने न्यायालय परिसर के पास एक कैंटीन भी शुरू की, जहां उनके तैयार किए गए सोया उत्पाद उपलब्ध कराए जाते हैं।
उनकी इस पहल से मासिक आय करीब 50 हजार रुपये तक पहुंच गई है। यदि उन्हें इसी प्रकार प्रशिक्षण, ऋण और विपणन की सुविधाएं मिलती रहें तो वे अपने उत्पादों को बड़े बाजारों तक पहुंचाकर और अधिक महिलाओं को रोजगार उपलब्ध करा सकती हैं। गांव मिल्क खास की यह पहल महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण स्वरोजगार का सफल उदाहरण बनकर उभरी है।