यमुनानगर। 48 कोस कुरुक्षेत्र में महाभारत युद्ध से जुड़े अभी तक बहुत सी वस्तुएं मिल चुकी हैं, लेकिन अगर यहां की धरती का सीना चीरा जाए तो उस समय युद्ध के दौरान के अस्थि अवशेष भी मिल सकते हैं और यह इस तरह ही पहली खोज होगी। यह तथ्य खोजा है द बुद्धिस्ट फोरम के जनरल सेक्रेटरी सिद्धार्थ गौरी ने। इस संबंध में उन्होंने संस्कृति मंत्री जीके रेड्डी को पत्र लिख कर खोज में हस्तक्षेप की मांग की है।
सिद्धार्थ गौरी ने बताया कि चीनी यात्री जुआन जांग 7वीं शताब्दी ई. के दौरान कुरुक्षेत्र का दौरा किया था, जिसे पहले थानेसर कहा जाता था। उन्होंने सरस्वती नदी के औजस घाट के पास अस्थि अवशेषों का एक विशाल ढेर देखा। तब उसे यह बताया गया कि ये कुरुक्षेत्र में हुए महाभारत युद्ध के अस्थि अवशेष हैं।
गौरी ने बताया कि 14वीं शताब्दी ई. के दौरान, फ़िरोज़ शाह तुगलक के इतिहास में कहा गया है कि उसके एक नागरिक काल के दौरान काम करता है। 50 हजार लोगों की एक टीम सरस्वती नदी का मार्ग बदलने के लिए कुरुक्षेत्र आई थी। उस समय उन्हें फिर से हड्डियों का यह विशाल ढेर पड़ा हुआ दिखाई दिया, उन्होंने इसे हाथियों की और मानव की हड्डियां बताया।
हड्डियां जो मनुष्य के वर्तमान आकार से बड़ी थीं। कुछ हड्डियां दशकों पुरानी हैं और बाकी अभी भी मजबूत हैं। ये दोनों संदर्भ अलग-अलग समय और गैर-हिंदू स्रोतों से हैं जो अस्थि अवशेषों के अस्तित्व को बताते हैं। उन पर भरोसा किया जा सकता था। इसके लिए सरस्वती नदी के औजस घाट के आसपास एक लेडर भूमिगत सर्वेक्षण किया जाए तो यह महाभारत युद्ध के लिए महान साक्ष्य हो सकता है। संवाद