यमुनानगर। भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव की चर्चा हर किसी की जुबां पर है। ऐसा ही माहौल फौजियों के गांव तिगरा में है, जहां चौपालों व बैठकों में यह मुद्दा सुनाई दे रहा है। सरहद पर डंटे गांव के 27 जवानों की रक्षा के लिए दुआएं भी हो रही हैं।
सैनिकों के घरों पर माता, पिता, पत्नी, बच्चों के चेहरों पर चिंता से ज्यादा गर्व दिख रहा है कि परिवार से कोई देश के काम आ रहा है। गांव के 18 से 25 की उम्र के 63 युवा भी बुलावे पर देश सेवा के लिए तैयार हैं। गांव के पांच सेवानिवृत्त सैनिक भी देश की रक्षा के लिए दोबारा तैयार हैं।
तिगरा के ताश खेल रहे बुजुर्ग बोले कि उन्हें देश की रक्षा में लगे गांव सहित देश के जवानों पर पूरा भरोसा है। सेना में सेवारत गांव के जवान आखिरी सांस तक जंग के मैदान में डटे रवैंगे और देश की रक्षा के साथ दुश्मन देश को मुंह तोड़ जवाब देंगे। सैनिक के घरों पर परिवार अपने जिगर के टुकड़ों की सलामती की दुआ कर रहे हैं। गांव के खेड़ा व अन्य मंदिरों सहित घर के मंदिर में पूजा की जा रही है।
2050 आबादी वाले गांव तिगरा में करीब 250 घर हैं। गांव का हर पांचवां घर सेना में सेवारत या सेवानिवृत्त सैनिकों का है। गांव के 27 जवान सेना अलग-अलग जगह तैनात हैं। गांव में पांच सेवानिवृत्त सैनिक हैं, वहीं सेना में सेवाएं दे चुके चार लोग इस दुनिया में नहीं हैं। स्टेडियम में अभ्यास करने पहुंचे तरुण राणा, विशाल राणा, अभिषेक राणा, रोहित राणा ने कहा कि वह एक बुलावे पर देशसेवा के लिए तैयार हैं।
सेवानिवृत्त सैनिक मुनीलाल ने कहा कि भारत ने पहलगाम में हुए आतंकी हमले का बदला ले लिया है। आतंकी ठिकानों को तबाह कर देश के रक्षकों ने दिखा दिया है कि कोई भी भारत को आंख दिखाएगा तो उसे उसकी भाषा में सबक सिखाया जाएगा।
सेवानिवृत्त सैनिक सुशील ने कहा कि गांव का बच्चे बच्चे में देशसेवा का जज्बा है। तीन दशक से गांव में भारतीय सेना में भर्ती का रुझान बना हुआ है। तनाव के दौरान गांव के जवान सेना में तैनात रहे, इस बात का पूरे गांव को गर्व महसूस हो रहा है।
सरपंच प्रतिनिधि कमल राणा ने कहा कि गांव के जवान हमेशा देशसेवा के लिए तैयार हैं। सेना में 27 जवान सेवारत हैं, वहीं 63 युवा सेना में जाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। एक बुलावे पर युवा देश सेवा को तत्पर है। सेवानिवृत्त सैनिक भी पीछे नहीं रहेंगे। संवाद