संवाद न्यूज एजेंसी
व्यासपुर। हरियाणा सिख एकता दल की एक अहम बैठक किला लोहगढ़ साहिब में सोमवार को हुई। इस दौरान हरियाणा सिख एकता दल के सदस्योंं व सिख संगत ने भाग लिया। संगत ने कहा कि गत 27 अक्तूबर को लोहगढ़ साहिब में केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल की ओर से सिख जरनैल बाबा बंदा सिंह बहादुर की याद में बनाए जाने वाले स्मारक व संग्रहालय का भूमि पूजन व हवन कर उद्घाटन सिख मर्यादा के बिल्कुल विपरीत है।
हरियाणा सिख एकता दल के वक्ता गुरजीत सिंह डमौली, बलकार सिंह, चरण जीत सिंह चन्नी, जसदीप सिंह रंधावा, जगदीप औलख, विक्रम राणा, अरमजीत सिंह, कर्मजीत सिंह ने कहा कि सिख कौम के महान जरनैल खालसा राज के पहले संस्थापक और अमर शहीद बाबा बंदा सिंह बहादुर ने गुरु गोबिंद सिंह जी से अमृत छक कर, उनके बताए मार्ग पर चलते हुए उत्तर भारत से मुगल सल्तनत की जड़ों को उखाड़ फेंका था। उनकी शौर्यगाथा सिख इतिहास की अमर विरासत है।
इसी महान वीर की स्मृति में हरियाणा सरकार की ओर से लोहगढ़ में बनाए जा रहे बाबा बंदा सिंह बहादुर संग्रहालय के भूमि पूजन कार्यक्रम में सिख रीति-धार्मिक परंपरा के विपरीत भूमि पूजन किए जाने पर प्रदेश व देशभर की सिख संगत में गहरा रोष व्याप्त है। आरोप है प्रदेश सरकार के की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी व हरियाणा सिख एकता दल व सिख समाज लोग व अन्य किसी सिख संगठन के लोगों को नहीं बुलाया गया।
हरियाणा सिख एकता के वक्ताओं ने कहा कि सनातन धर्म की परंपराओं का सम्मान करते हैं, लेकिन सिख धर्म की अपनी विशिष्ट मर्यादा है। सिख गुरुओं, अमर सिख शहीदों से जुड़े पाठ, कीर्तन या अरदास के साथ रखी जाती है। जब किसी स्थल का नाम अमर शहीद बाबा बंदा सिंह बहादुर जी के नाम से जोड़ा गया है, तो यहां कार्यक्रम सिख मर्यादा के अनुसार ही होना चाहिए था।