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संगति से बदलता है आचरण : नीरू भारती

Mon, 06 Jan 2025 12:05 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
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संवाद न्यूज एजेंसी
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जगाधरी। हनुमान गेट स्थित दिव्य ज्योति जागृति संस्थान आश्रम में रविवार को साप्ताहिक सत्संग का आयोजन हुआ। आशुतोष महाराज की शिष्या साध्वी नीरू भारती ने जीवन में सत्संग के प्रभाव का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि हर मनुष्य के स्वभाव, व्यवहार व जीवन पर संगति का गहरा प्रभाव होता है। जन्म के बाद मानव को जैसा वातावरण व संगति मिलती है, वह व्यक्तित्व व आचरण बनकर समाज के सम्मुख आता है।
उन्होंने कहा कि सत्संग से ही मनुष्य का विवेक जागृत होता है। चूंकि सत्संग में बैठने से केवल महान विचार ही नहीं प्राप्त होते, बल्कि सत्संग प्रवक्ता के दिव्य आचरण व व्यक्तित्व की तरंगों का प्रभाव भी श्रोता पर पड़ता है। जिससे उसका जीवन भी सात्विक व पवित्र विचारों से ओतप्रोत हो जाता है। अच्छे विचार सुनना मात्र ही सत्संग नहीं होता अपितु सत्संग उस जहाज की तरह है, जो हमें नश्वर संसार के किनारे से परमात्मा के दिव्य साम्राज्य तक ले जाता है।
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ब्रह्मनिष्ठ संत जब परमात्मा के परम प्रकाश स्वरूप से जुड़ कर अपने मुख से जो उच्चारित करते हैं तो वे मात्र शब्द नहीं बल्कि वह मानव जीवन को परिवर्तित कर देने का सामर्थ्य रखने वाले सूत्र होते हैं। सत्संग के प्रभाव से ही मनुष्य का जीवन अधोगति से उधर्वमुखी हो जाता है। इसके प्रभाव से ही मनुष्य अपने जीवन का उत्थान स्वयं कर मानव से देवत्व की यात्रा को सुगमता व सहजता से परिपूर्ण कर लेता है।
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सत्संग ने ही नरेंद्र को स्वामी विवेकानंद, राम बोला को गोस्वामी तुलसीदास और मुकुंद को योगानंद परमहंस बना दिया था। साधारण व्यक्ति से महान व्यक्तित्व का निर्माण करने की यात्रा का आरंभ और अंत सत्संग से ही होता है।
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