संवाद न्यूज एजेेंसी
यमुनानगर। कभी केवल घरेलू जिम्मेदारियों तक सीमित रहने वाली ग्रामीण महिलाएं अब आत्मनिर्भरता की राह पर बढ़ रही हैं। स्वरोजगार योजनाओं, स्वयं सहायता समूहों और सरकारी सहायता से महिलाएं परिवार की आर्थिक स्थिति को भी मजबूत करने में अहम भूमिका निभा रही हैं।
जिले के कई गांवों में महिलाओं ने छोटे स्तर से कारोबार शुरू कर सफलता की मिसाल पेश की है। ग्रामीण महिलाओं ने समूह बनाकर आपसी सहयोग से विभिन्न व्यवसाय शुरू किए हैं। इनमें पशुपालन, डेयरी, ब्यूटी पार्लर, कॉस्मेटिक की दुकान, कपड़ा व्यवसाय, करियाना स्टोर और घरेलू उत्पाद तैयार करने जैसे कार्य प्रमुख हैं। कई महिलाओं ने बैंक से ऋण लेकर अपना रोजगार स्थापित किया, जिससे उनकी आय में लगातार वृद्धि हो रही है।
शमीम, प्रवीन रानी, कविता कांबोज, प्रवेश पुष्पा, रीना देवी, नीलम, कांता देवी, मनीषा अग्रवाल, सुषमा महेश्वरी आदि का कहना है कि शुरुआत में उन्हें कारोबार को लेकर झिझक थी, लेकिन प्रशिक्षण और अन्य सफल महिलाओं से प्रेरणा मिलने के बाद उन्होंने आगे बढ़ने का निर्णय लिया। परिवार के सहयोग और आत्मविश्वास के बल पर आज वे आर्थिक रूप से सशक्त बन रही हैं। इससे बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और घरेलू जरूरतों को पूरा करना भी पहले की तुलना में आसान हुआ है।
ग्रामीण क्षेत्रों में ग्रुप की नियमित बैठकें आयोजित कर नई महिलाओं को प्रशिक्षण और स्वरोजगार की जानकारी भी दे रहे हैं। समूह की सदस्य अपने अनुभव साझा कर अन्य महिलाओं को व्यवसाय शुरू करने के लिए प्रेरित कर रही हैं। इससे गांवों में महिला उद्यमिता का दायरा लगातार बढ़ रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ने से परिवार के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था भी मजबूत हो रही है। छोटे-छोटे व्यवसाय अब कई परिवारों के लिए स्थायी आय का माध्यम बन चुके हैं। महिलाओं की बढ़ती भागीदारी से यह साबित हो रहा है कि यदि उन्हें अवसर, प्रशिक्षण और वित्तीय सहयोग मिले तो वे किसी भी क्षेत्र में सफलता हासिल कर सकती हैं। आज ग्रामीण महिलाओं की यह बदलती तस्वीर आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक सकारात्मक और प्रेरणादायी कदम मानी जा रही है।
महिलाओं को ऋण के बारे में जानकारी अधिकारी। आर्काइव
महिलाओं को ऋण के बारे में जानकारी अधिकारी। आर्काइव