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आषाढ़ निकला सूखा, सावन से भी टूट रही आस

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माई सिटी रिपोर्टर
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यमुनानगर। इस बार आषाढ़ का महीना पूरी तरह सूखा निकल गया। पूरे महीने में केवल पांच दिन ही बारिश हुई। इस साल आषाढ़ के महीने यानि जुलाई में केवल 260 एमएम बारिश हुई है। वहीं पिछले साल 1617 एमएम बारिश हुई थी। पिछले चार साल में पहली बार आषाढ़ सूखा रहा है। अब सावन के शुरू के तीन दिन बादलों की आवाजाही से लोगों की उम्मीदें जगी, लेकिन तपन और उमस ने इन उम्मीदों पर पानी फिरता नजर आ रहा है।
जिले में शनिवार को छाए बादलों से झमाझम बारिश की उम्मीद बन रही थी, लेकिन बादल बिना बरसे ही निकल गए। इससे लोगों की उम्मीदों पर पानी फिर गया। वहीं बारिश की कमी से धान व गन्ना उत्पादक किसानों के चेहरों पर भी मायूसी है। जिस वक्त धान में पानी की जरूरत थी, उस वक्त बारिश हुई ही नहीं। अब सावन में अच्छी बारिश होती है तो धान और गन्ने की फसल को फायदा होगा। हालांकि ज्यादा बारिश से सब्जी और बेलदार फसल खराब हो सकती है।
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जुलाई में कब कितनी बारिश
साल बारिश
2015 420 मिमी
2016 416 मिमी
2017 126 मिमी
2018 368 मिमी
2019 346 मिमी
2020 1617 मिमी
2021 260 मिमी
कम बरसात के ये हैं कारण
मौसम वैज्ञानिक डॉ. अजीत सिंह के मुताबिक मानसून में हर महीने कम से कम दो अनुकूल मौसम प्रणाली बननी चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं होने के कारण कम बरसात हुई है। आषाढ़ बीतने तक मौसम चक्र कमजोर रहा है। जुलाई के पहले सप्ताह में बेहतर मौसम चक्र बनने से 67 मिमी बरसात हुई, लेकिन अब फिर से मौसम चक्र कमजोर है। चक्रवात औैर पश्चिमी विक्षोभ भी इस कमी को पूरा नहीं कर पा रहे हैं। प्रदूषण बढ़ना, पेड़ कटना और एसी के प्रयोग से निकलने वाली गर्म हवाएं भी कहीं न कहीं जिम्मेदार हैं। पिछले साल लॉकडाउन के चलते पर्यावरण बेहतर था तो रिकॉर्ड तोड़ बारिश हुई थी।
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जुलाई में होनी चाहिए ती 500 मिमी बारिश : डॉ. सिंह
कृषि उपनिदेशक डॉ. जसविंद्र सिंह का कहना है कि मानसून के सीजन में जुलाई में कम से कम 500 मिमी बारिश होनी चाहिए थी, लेकिन अब तक जिले में केवल 260 एमएम बरसात ही हो पाई है। वहीं कई राज्यों में निम्न वायुदाब के भी कमजोर रहने के चलते इसका असर हरियाणा में नहीं हो पाया है। बिखरे बादलों से मानसून का लक्ष्य पूरा नहीं हो पा रहा है। उन्होंने बताया कि औसतन बारिश काफी कम हुई है, लेकिन धान व अन्य फसलों के लिए यह पर्याप्त है। उम्मीद है कि अगस्त में बारिश की कमी पूरी हो जाएगी।
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