संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। आशा वर्कर्स 12 फरवरी 2026 को राष्ट्रव्यापी हड़ताल पर जाएंगी। यह निर्णय आशा वर्कर्स यूनियन हरियाणा ने मंगलवार को लिया। यूनियन ने इस संबंध में एनएचएम के मिशन निदेशक को नोटिस भेजकर हड़ताल की सूचना दी है। आशा कार्यकर्ताओं ने मांगों के समर्थन में जिला नागरिक अस्पताल में नारेबाजी कार्यवाहक सिविल सर्जन डॉ. विपिन गोंदवाल को ज्ञापन सौंपा।
यूनियन की जिला प्रधान राजेश कुमार, उप प्रधान सुनीता रोहिला ने कहा कि आशा कार्यकर्ता पिछले कई वर्षों से इंसेंटिव आधारित मानदेय पर काम कर रही हैं और भारत सरकार व राज्य सरकार द्वारा उन्हें लगातार अतिरिक्त जिम्मेदारियां सौंपी जा रही हैं। लेकिन, इसके अनुरूप न तो मानदेय बढ़ाया गया है और न ही सामाजिक सुरक्षा दी गई है।
आशा कार्यकर्ताओं पर बिना संसाधन के ऑनलाइन और डिजिटल कार्य का दबाव बनाया जा रहा है, जिससे वे मानसिक और आर्थिक रूप से प्रताड़ित हो रही हैं। सरकार द्वारा स्वास्थ्य बजट में कटौती का सीधा असर आशा कार्यकर्ताओं पर पड़ रहा है। इसी के विरोध में 12 फरवरी को ट्रेड यूनियन के आह्वान पर देशव्यापी हड़ताल में आशा कार्यकर्ता सक्रिय भागीदारी करेंगी।
आशा वर्करों की प्रमुख मांगों में गर्भवती महिलाओं के इंसेंटिव पर लगाए गए प्रतिबंध को हटाना, 73 दिनों की पूर्व हड़ताल के दौरान काटे गए मानदेय का भुगतान, न्यूनतम वेतन 30,000 रुपये प्रतिमाह और 10,000 रुपये पेंशन शामिल है। साथ ही 45वें भारतीय श्रम सम्मेलन की सिफारिशों को लागू करने की मांग की गई है।
इसके अलावा आशा वर्करों के लिए छह माह का सवेतन मातृत्व अवकाश, 20 दिन का आकस्मिक अवकाश और चिकित्सा अवकाश, पीएचसी और सीएचसी में आशा विश्राम कक्ष की सुविधा, डिजिटल कार्य के लिए बेहतर उपकरण और प्रशिक्षण तथा दुर्घटना बीमा व सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की गई।
उन्होंने मांग की कि बिना मानदेय के अतिरिक्त कार्य न दिया जाए, पोश अधिनियम को सख्ती से लागू करने और केंद्र व राज्य की सभी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ बिना आय सीमा के देने की मांग की। साथ ही सरकारी अस्पतालों में आशा कार्यकर्ता और उनके परिवारों को कैशलेस इलाज की सुविधा देने की मांग की।
जिला नागरिक अस्पताल में प्रदर्शन करतीं आशा कार्यकर्ता। संवाद