आयुष्मान बीमा योजना में आने को लोगों अपने-अपने जुगाड़ लगा रहे हैं। लेकिन लोग इसके प्रति जागरूक नहीं है। जिस कारण अधिकांश लोग इस योजना से दूर हैं। हैरानी की बात ये है कि इस योजना को लागू हुए लगभग दो वर्ष होने वाले है। इस योजना के बारे लगभग चार लाख लोगों पर प्रधानमंत्री की चिट्ठी भी आ चुकी है। लेकिन, लोग इस चिट्ठी को दबाए बैठे हैं। गोल्डन कार्ड बनवाने को लेकर गंभीर भी नहीं है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग को भी अपना टारगेट पूर्ण करना चुनौती बन गया है। इसके लिए आशा वर्कर और सक्षमकर्मी घर घर जाएंगे। 997 आशा वर्कर और 700 सक्षमकर्मी सभी ब्लॉक और तहसील में जाकर पात्रों के कार्ड बनवाएंगे।
आयुष्मान योजना के गोल्डन कार्ड ट्विनसिटी में टारगेट से काफी कम बने हुए है। हालांकि, दावा है कि प्रदेशभर में कार्ड बनवाने और इलाज कराने को लेकर जिला अच्छे स्थान पर है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग की नैया को पार लगाने के लिए आशा वर्कर और सक्षम कर्मियों को जिम्मेदारी दी गई है। ये आयुष्मान योजना के पात्र लोगों के घर जाकर उनके गोल्डन कार्ड बनवाएंगे। इसी के साथ अन्य बीमारियों की स्क्रीनिंग की जाएगी। यदि किसी भी क्षेत्र में अधिक आयुष्मान के अधिक पात्र मिले तो वहां पर टीम को भेजकर वहीं कैंप लगाया जायेगा और गोल्डन कार्ड बनाये जायेंगे। आज से टीम को क्षेत्र भी वितरित किए जायेंगे।
स्वास्थ्य विभाग में है कर्मचारियों की कमी
विभाग में कर्मचारियों की कमी है। इस कारण यहां सक्षम युवाओं को लगाया गए हुए है। आयुष्मान योजना में जिले में लगभग 40 हजार गोल्डन कार्ड बने हुए हैं। जबकि चार लोगों के कार्ड बनाए जाने हैं। लेकिन, दो वर्ष के बाद भी ये टारगेट पूर्ण नहीं हो पाया है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग की कही न कही लापरवाही सामने आ रही है। लेकिन स्वास्थ्य विभाग लोगों के जागरूक न होने की बात कह रहा है।
जिले में आयुष्मान योजना में आई हुई चिट्ठी पात्र लोग दबाए हुए है। अपने गोल्डन कार्ड बनवाने के लिए भी गंभीर नहीं है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग 997 आशा वर्करों और 700 सक्षम कर्मियों को गोल्डन कार्ड बनवाने के लिए क्षेत्र में भेजा जायेगा। जो ऐसे पात्रों को ढूढ़ेंगे, जिनके पास प्रधानमंत्री की चिट्ठी है और फिर इनके गोल्डन कार्ड बनवायेगा।
-डॉ. कुलदीप सिंह, सिविल सर्जन यमुनानगर।