कर्मचारियों की हड़ताल के चलते दूसरे दिन जिले के अधिकांश सरकारी बैंकों के एटीएम कैश लैस हो गए। एटीएम से भी रुपये न निकले पर लोगों को परेशान होकर निजी बैंकों के एटीएम का सहारा लेना पड़ा। वहीं सभी एटीएम यूजर्स का बोझ निजी बैंकों पर पड़ने से उनके एटीएम भी जल्दी खाली हो गए। वहीं कुछ एटीएम में केवल दो हजार का नोट ही निकला। जिससे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। शनिवार को लोग बैंक पहुंचे तो गेट पर ताला और दो दिन की हड़ताल का नोटिस चस्पा मिला। जिससे उपभोक्ताओं को मायूस होकर लौटना पड़ा। वहीं हड़ताल के कारण 30 बैंकों की 253 शाखाओं में चैक क्लीयरनेंस सहित अन्य काम काज प्रभावित हुआ।
शनिवार को बैंक पहुंचे लोगों को मायूस ही लौटना पड़ा। कई लोगों के जरूरी काम रूक गए। बैंक बंद होने से करीब तीन सौ करोड़ रुपये से ज्यादा का लेनदेन प्रभावित हुआ। दूसरे दिन भी जिले के सभी सरकारी बैंकों की शाखाएं बंद रही। हड़ताल के चलते एटीएम में पैसे भी नहीं डाले जा सके। लोगों को रुपये निकालने के लिए प्राइवेट बैंकों के एटीएम का सहारा लेना पड़ा। जिले के अधिकांश सरकारी एटीएम में कैशलैस हो गया। किसी में केवल दो हजार के ही नोट थे। इसके अलावा चैक की क्लीयर्नेंस भी नहीं हो सकी। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन (यूएफबीयू) के आह्वान पर सभी सरकारी बैंकों के कर्मचारी दो दिन की हड़ताल पर हैं। शनिवार को कर्मचारियों ने सरकार और आईबीए के खिलाफ नारेबाजी की। हड़ताल में एसबीआई, बैंक ऑफ बड़ौदा, पंजाब नेशनल बैंक, ओरियंटल बैंक ऑफ कामर्स, बैंक ऑफ इंडिया, केनरा बैंक, पंजाब एंड सिंध बैंक, इलाबाद बैंक सहित सभी राष्ट्रीयकृत बैंक शामिल रहे। जबकि आईसीआईसीआई, एचडीएफसी, एक्सिस बैंक, आईडीबीआई आदि निजी बैंक खुले रहे। वहीं को-ऑपरेटिव और ग्रामीण बैंक हड़ताल में शामिल नहीं हुए। बैंक आए उपभोक्ता सवानी पुरी निवासी धर्मेंद्र कुमार व सरोजनी कॉलोनी निवासी मौलिक ने बताया कि दो दिन से लेनदेन का काम लटका हुआ है। अब काम सोमवार तक लटक गया। धर्मेंद्र ने बताया कि उन्होंने जरूरी ट्रांजेक्शन करनी थी।
डॉ. कृष्ण लाल गोदवाल ने कहा कि हमारा वेतन समझौता नंवबर 2017 से लागू होना था। 30 माह बीत जाने के बाद भी सरकार समझौता नहीं कर रही है। मई 2018 में आईबीएम बैंकों के कर्मचारियों के वेतन में 20 प्रतिशत की वेतन वृद्धि का शर्मनाक प्रस्ताव रखती है। आईबीए ने 12.25 प्रतिशत की वेतन वृद्धि का संशोधित ऑफर दिया। जिस पर यूएफबीयू ने न्यूनतम 20 प्रतिशत वेतन वृद्धि की मांग की। दो दिनों के हड़ताल के बाद साप्ताहिक अवकाश है। इस दौरान जसबीर, कृष्ण लाल गोदवाल, गुरमुख सिंह, एसके गुप्ता, अनिल गुप्ता, नरोत्तम अग्रवाल, गुरनाम सिंहज, शिवभगत, सुशील कटारिया, विकास वर्मा, नरेशपाल, अकुंश कुमार, प्रशांत कुमार, नवनीत कालड़ा, रामशरन आदि मौजूद रहे।
मार्च में एक सप्ताह बैंक हो सकते हैं बंद
यूएफबीयू पदाधिकारियों का कहना है कि सरकार कर्मचारियों की ओर ध्यान नहीं दे रही है। जिसके चलते मार्च में भी कर्मचारी हड़ताल पर जा सकते हैं। यदि यह हड़ताल होती है तो छह दिन बैंक बंद रहेंगे। यूनियन का 11, 12 व 13 मार्च को हड़ताल प्रस्ताव है। 10 मार्च को होली है। जिस कारण बैंक की छुट्टी है। वहीं 14 मार्च को शनिवार है और 15 मार्च को रविवार है। इसलिए छह दिन बैंक बंद रहेंगे। छह दिन बैंक होने से उपभोक्ताओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। फिर भी सरकार नही मानती तो बैंक कर्मी एक अप्रैल से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने के लिए तैयार रहेंगे।
हड़ताली कर्मचारियों का कटेगा 50 लाख वेतन
मांगों को लेकर हड़ताल पर रहे कर्मचारियों का दो दिन का वेतन कटेगा। हड़ताल में 30 बैंकों की 253 शाखाओं के करीब साढ़े 12 सौ कर्मचारी हड़ताल पर हैं। इनका दो दिन का वेतन करीब 50 लाख रुपये बनता है। हड़ताली कर्मचारियों का एक दिन का वेतन करीब दो हजार रुपये है। जिस हिसाब से एक कर्मचारी का दो दिन का वेतन दो हजार रुपये हुआ। साढ़े 12 कर्मचारियों का दो दिन का वेतन 50 लाख से अधिक बनता है। जो बैंक की ओर से काटा जाएगा।
लोन की किश्तें भरने वालों की रही भीड़
महीने के अंतिम दिन हड़ताल होने के कारण लोन की किश्त भरने वालों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ा। 31 जनवरी और पहली फरवरी को हड़ताल के कारण बैंक बंद रहे वहीं दो फरवरी को रविवार के कारण बैंक बंद है। ऐसे में पहली और दूसरी तारीख को लोन की किश्त भरने वालों को परेशान होना पड़ा। दो से पहले अपनी किश्तें भरने के लिए सीएससी पर लोगों की भीड़ बढ़ गई।
ये है मांगे
- समान काम के बदले समान वेतन।
- रिटायरमेंट लाभ को आयकर से मुक्त करना।
- मूल वेतन में विशेष भत्ता का मर्जर।
- अपडेट पेंशन, पारिवारिक पेंशन में बढ़ोतरी।
- नए पेंशन स्कीम को रद करना।
- बैंकिंग कारोबार की अवधि एक समान तय करना।
- अधिकारियों के लिए नियत कार्य अविध तय करना आदि।