संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। महाराणा प्रताप चौक (पुराना कमानी चौक) से विश्वकर्मा चौक के बीच पुराना नेशनल हाईवे को पार करते समय लोगों को अब सड़क हादसे का शिकार नहीं होना पड़ेगा। हादसा न हो इसके लिए दोनों चौक के बीच स्थित रेलवे ओवरब्रिज के नीचे अंडरपास बनाया जाएगा। अंडरपास बनाने के लिए पीडब्ल्यूडी ने निविदा जारी की है। अंडरपास पर करीब 1.06 करोड़ रुपये का खर्च आएगा।
रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) से नीचे उतरते हैं तो ढलान अधिक होने से वाहन बहुत तेज गति से महाराणा प्रताप चौक की तरफ आते हैं। इसलिए पीडब्ल्यूडी ने आरओबी से करीब 100 मीटर तक सड़क के दोनों तरफ लोहे की ग्रिल लगवा दी थी, ताकि लोग आरओबी के पास से सड़क पार न करें, मगर यह प्रयोग भी कामयाब नहीं हुआ। तीन फीट ऊंची इस ग्रिल को लोग आसानी से फांद कर सड़क के दूसरी तरफ जाने लगे।
इसके बाद ग्रिल को तोड़ दिया गया, जिसमें से बाइक व साइकिल सवार भी निकलने लगे। अब दाएं-बाएं से बाइक सवार अचानक सड़क पर आते हैं और हादसा हो जाता है। महाराणा प्रताप चौक से रेलवे ओवरब्रिज के बीच का हिस्सा ब्लैक स्पॉट है। इंडस्ट्रियल एरिया, विजय कॉलोनी से कुलदीप नगर व गांधी नगर की तरफ दर्जनों कॉलोनियां हैं। जिनमें 50 हजार से ज्यादा लोग रहते हैं।
इन कॉलोनियों के लोग इंडस्ट्रियल एरिया, सब्जी मंडी के अलावा पुराना रादौर रोड, नगर निगम कार्यालय व स्टेशन रोड की तरफ जाने के लिए सड़क को पार करते हैं। रेलवे ओवरब्रिज शहर की लाइफलाइन है। इसलिए इस सड़क पर सबसे ज्यादा भीड़ रहती है। इस सड़क से शहर के अलावा कुरुक्षेत्र, पानीपत, करनाल, दिल्ली और उत्तर प्रदेश की तरफ से भी वाहनों का आना जाना है। यहां 35 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है।
अंडरपास 11 साल पहले हुआ था बंद
रेलवे ओवरब्रिज के नीचे पहले अंडरपास था। जिसके नीचे से सड़क के दोनों तरफ रहने वाले लोग बिना किसी हादसे के सड़क पार करते थे। परंतु इंडस्ट्रियल एरिया में जाने वाले भारी वाहन भी निकलने लगे थे। साथ ही इसमें बारिश का पानी भी भर जाता था। इससे रेलवे ओवरब्रिज को भी खतरा होने की आशंका था। इसलिए करीब 11 साल पहले अंडरपास के दोनों तरफ दीवार कर इसे बंद कर दिया था। इसके बाद से हादसे होने लगे। अंडरपास बंद होने से यहां हो रहे हादसों का का मामला अमर उजाला ने कई बार उठाया था। इसके बाद रोड सेफ्टी की बैठक में यह मामला उठा था।
रेलवे ओवरब्रिज के नीचे अंडरपास बनाया जाना है। अंडर पास पर करीब 1.06 करोड़ रुपये खर्च होगा। निविदा जारी कर दी गई है। निविदा प्रक्रिया पूरी होने के बाद वर्क अलॉट कर काम शुरू करवा दिया जाएगा। - पुनीत मित्तल, एक्सईएन पीडब्ल्यूडी।