व्यासपुर क्षेत्र की एक राइस मिल में रखा धान। संवाद
यमुनानगर। अभी तक माना जा रहा था कि धान का गबन केवल प्रतापनगर, छछरौली व रणजीतपुर की सात राइस मिलों में ही हुआ है। वहीं रविवार को खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के निदेशक कार्यालय में भेजी गई एक गुमनाम चिट्ठी ने न केवल दर्जनभर और राइस मिलरों की नींद उड़ा दी है बल्कि विभाग में भी हलचल पैदा कर दी है। गुमनाम चिट्ठी में घोटाले में शामिल राइस मिलरों के नाम भी दिए गए हैं। जिसमें साफ साफ लिखा है कि यदि इन राइस मिलों में भी जांच की जाए तो धान का घोटाला 1,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का हो सकता है। चिट्ठी में कुछ अधिकारियों के शामिल होने की बात कही गई है। यदि चिट्ठी में लगाए गए सभी आरोप सही हैं तो निश्चित ही यह जांच का विषय है।
निदेशक को भेजी गई चिट्ठी में प्रतापनगर व छछरौली की छह राइस मिल, व्यासपुर खंड की पांच राइस मिल व सरस्वतीनगर क्षेत्र की दो व एक अन्य राइस मिलों के नाम लिखे गए हैं। जिसमें कहा गया है कि डिफाल्टर राइस मिलरों को भी विभाग की तरफ से कुटाई के लिए क्षमता से ज्यादा धान दिया गया। यदि इनकी फिजिकल वेरिफिकेशन करवाई जाए तो एक हजार करोड़ रुपये के घोटाले का खुलासा हो सकता है।
सरस्वतीनगर के मिलर को बताया दलाल
चिट्ठी में इससे भी बड़ा आरोप लगाया गया है। इसमें कहा गया है कि सरस्वतीनगर स्थित राइस मिल का एक संचालक खाद्य एवं आपूर्ति विभाग में दलाल की भूमिका निभा रहा है। वह राइस मिलरों से पैसे एकत्रित करके अधिकारियों को देता है। इसलिए इन राइस मिलरों की जल्द से जल्द जांच करवाई जानी चाहिए। इससे यह भी पता चल जाएगा कि अफसर कितने भ्रष्टाचारी हैं। इतना ही नहीं बी ग्रेड धान को ए ग्रेड बनाकर बेचा जा रहा है। इसके लिए 50 रुपये प्रति क्विंटल का आदान प्रदान होता है। इसमें धान खरीदने वाली एजेंसी, मार्केट कमेटी के अधिकारी व राइस मिलर भी शामिल हैं। धान का जो गबन सामने आ रहा है वह अधिकारियों की मिलीभगत के बिना संभव नहीं हो सकता। क्योंकि अपने स्तर पर कोई भी राइस मिलर इतना बड़ा गबन नहीं कर सकता। ऐसे में अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध लग रही है। विभाग के निदेशक डीएफएससी कार्यालय के तीन इंस्पेक्टरों, दो डिलिंग हेड व एक एसओ का रिकॉर्ड पहले ही मांग चुका है। ऐसे में इन सभी पर विभागीय कार्रवाई होना तय है।
इस मामले की जांच के लिए विभागों से रिकॉर्ड मांगा गया है। कुछ रिकॉर्ड हमारे पास आ भी गया है। पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जांच करेगी। कितना धान खरीदा, किसने खरीदा, किस राइस मिल की कितनी क्षमता है और उसे कितना धान दिया गया इन सभी की जांच की जाएगी। जल्द ही मामले को सुलझा दिया जाएगा।
- रजत गुलिया, डीएसपी एवं एसआईटी इंचार्ज।