संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। धान के छोटे-बड़े पौधों ने किसानों की नींद उड़ा दी है। हालात ऐसे हो गए हैं कि किसानों ने फसल पर ट्रैक्टर चलाना शुरू कर दिया है। किसानों को वर्ष 2022 की तरह धान में आई बीमारी की चिंता सताने लगी है। वहीं कृषि वैज्ञानिकों ने पौधों के सैंपल लेकर जांच के लिए चौधरी चरण सिंह कृषि यूनिवर्सिटी हिसार में भेजे। जांच रिपोर्ट से ही पता चलेगा कि बीज में ही खराबी है या फिर फसल में कोई बीमारी लगी है।
जिले में इस बार 85 हजार एकड़ से ज्यादा में किसानों ने धान की फसल लगाई है। इस बार मौसम भी धान के लिए अनुकूल रहा क्योंकि समय-समय पर बारिश होती रही। ऐसे में खेतों में रोपाई करते ही धान के पौधों ने अच्छी पकड़ शुरू कर दी थी। एकाएक कई गांवों में खेतों में धान के छोटे-बड़े पौधे दिखने लगे, जिन्हें देख कर किसानों की परेशान हो गए।
यह ठीक उसी तरह हैं जैसे वर्ष 2022 में हुआ था। तब खेतों में धान के छोटे-बड़े पौधे हो गए थे। जो पौधे छोटे रह गए थे उन पर धान की बाली भी नहीं आई थी। इससे किसानों को 50 से 70 प्रतिशत उपज का नुकसान हुआ था। ऐसे में अब कई किसानों ने फसल पर ट्रैक्टर चलवा दिया है, जिससे धान की दूसरी किस्म की पौध लगाई जा सके।
22 दिन बाद भी पौधे नहीं बढ़े : धर्मवीर
उपमंडल व्यासपुर के चाहड़वाला गांव निवासी किसान धर्मवीर ने बताया कि उन्होंने सावा 7301 व 7501 की पौध तैयार की थी। 22 दिन पहले खेतों में पौध लगाई थी। अचानक पौधों की बढ़ोतरी रुक गई। पहले तो कहीं-कहीं पौधे छोटे दिख रहे थे। जब पौधों को उखाड़ कर देखा कि उनमें गांठ बन गई है। इस पर सारी फसल पर ट्रैक्टर चला दिया है। एक एकड़ में पौधे लगाने व दवाइयों आदि पर उसका 20 से 25 हजार रुपये खर्च आया था। धर्मवीर का आरोप है कि बीज कंपनी ने किसानों के साथ धोखा किया है। आंबवाला, नवांशहर, चाहड़वाला में ज्यादातर किसानों ने 7301 व 7501 बीज ज्यादा लगाया है। 100 से 150 एकड़ में ऐसे ही छोटे-बड़े पौधे दिखाई दे रहे हैं। कई खेतों में फसलों में पीलापन आ गया है।
कुछ जगह खेतों में धान के छोटे-बड़े पौधे देखे गए हैं। अभी कुछ कहा नहीं जा सकता कि बीज में खराबी है फिर फसल में कोई बीमारी आई है। ऊंचा चांदना से धान के पौधों के सैंपल लेकर जांच के लिए चौधरी चरण सिंह कृषि यूनिवर्सिटी हिसार में भेजे गए हैं।किसानों को सलाह दी जाती है कि वह फसल पर नजर रखें। यदि कहीं इस तरह की दिक्कत है तो तुरंत इसकी सूचना अपने खंड कृषि कार्यालय या फिर केवीके दामला में दें। - डॉ. संदीप रावल, समन्वयक, कृषि विज्ञान केंद्र दामला।