संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। सिविल सर्जन कार्यालय के ट्रेनिंग हॉल में ड्रग नियंत्रण कार्यालय की ओर से केमिस्ट एसोसिएशन के लिए शनिवार काे कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिसका उद्देश्य सभी दवा विक्रेताओं को दवा वितरण के बारे में नियम कानूनों के बारे में संपूर्ण जानकारी प्रदान करना था।
इस कार्यशाला के दौरान राज्य औषधि नियंत्रण अधिकारी ललित गोयल, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अनुज मंगला, उप सिविल सर्जन डॉ. दिव्या मंगला, डॉ. गीता बेनीवाल, एडीए साक्षी, जिला औषधि नियंत्रण अधिकारी बिंदू धीमान व जिले के केमिस्ट एसोसिएशन के सदस्यों ने भाग लिया।
ललित गोयल ने बताया कि सभी दवा विक्रेताओं को अपना व्यवसाय आरंभ करने व चलाने के लिए नगर निगम व नगर पालिका नियमों के अनुसार दुकान एवं प्रतिष्ठान अधिनियम पंजीकरण कराना आवश्यक होता है। इसके साथ-साथ विक्रेता के पास फार्मासिस्ट की डिग्री होना भी आवश्यक है, जिसके आधार पर उनको मेडिकल स्टोर का लाइसेंस प्रदान किया जाता है।
फार्मासिस्ट को दुकान व फार्मेसी पर कानून व अधिनियमानुसार ही दवाओं को रखना चाहिए तथा उनका वितरण करना चाहिए। नियमानुसार बहुत सी दवाओं पर प्रतिबंध है तथा कई दवाएं केवल चिकित्सीय सलाह पर पर्ची अनुसार ही मरीज को प्रदान की जा सकती है। इसके साथ ही कई प्रकार की दवाओं का रिकॉर्ड रखना भी दवा विक्रेता के लिए आवश्यक है ताकि समय पर आवश्यकता होने पर दवा वितरण की जांच की जा सके।
सहायक जिला अटॉर्नी एडवोकेट साक्षी ने कहा कि पीसी पीएनडीटी एक्ट एवं एमटीपी एक्ट की जानकारी सभी दवा विक्रेताओं को होनी आवश्यक है, क्योंकि इन एक्ट के नियमों का उल्लंघन कर दवाएं बेचना एक दंडनीय अपराध है। जिसके चलते एक्ट का उल्लंघन करने पर दवा विक्रेता का लाइसेंस रद्द हो सकता है तथा जुर्माने के साथ-साथ जेल का भी प्रावधान है।
उप सिविल सर्जन डॉ. दिव्या मंगला ने बताया कि नियमानुसार कोई भी दवा विक्रेता एमआरपी से अधिक मूल्य पर अथवा दवा की समाप्ति दिनांक उपरांत दवा का वितरण अथवा भंडारण नहीं कर सकता। एमटीपी अधिनियम के तहत एमटीपी किट के प्रयोग का अधिकार पहले केवल विवाहित महिलाओं को चिकित्सीय सलाह पर प्राप्त था, परंतु सुप्रीम कोर्ट ने एमटीपी एक्ट 2021 के तहत 20 से 24 हफ्ते के बीच नाबालिग व अविवाहित महिलाओं को गर्भपात का अधिकार दिया है।