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आध्यात्मिक उन्नति के लिए गुरु आवश्यक : वंशिका

Mon, 30 Mar 2026 01:35 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
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 दिव्य ज्योति जागृति संस्थान आश्रम हनुमान गेट में उप​स्थित श्रद्धालु। आयोजक
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संवाद न्यूज एजेंसी
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जगाधरी/व्यासपुर। दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की ओर से रविवार को हनुमान गेट जगाधरी और व्यासपुर आश्रम में साप्ताहिक सत्संग का आयोजन किया गया। सत्संग में आशुतोष महाराज की शिष्याओं ने प्रवचन कर श्रद्धालुओं को गुरु महिमा व महत्व के बारे में बताया। जगाधरी में साध्वी वंशिका भारती और व्यासपुर में साध्वी सुमान्या भारती ने प्रवचन किया। इस दौरान उन्होंने श्रद्धालुओं को जीवन में गुरु का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि जिस तरह जीवित रहने के लिए श्वास अति आवश्यक है, उसी तरह आध्यात्मिक उन्नति व आत्म कल्याण के लिए गुरु की आवश्यकता है।
साध्वी वंशिका भारती ने कहा कि किसी भी क्षेत्र में पारंगत होने के लिए हम सर्वश्रेष्ठ गुरु का चुनाव करते हैं, परंतु अध्यात्म व भक्ति जैसे विराट व अलौकिक क्षेत्र में हम गुरु के बिना उतर जाते हैं। इस प्रयास से तो हमारे भक्ति मार्ग में सूक्ष्म अहंकार और दंभ जैसी कई बाधाएं आती हैं, जो हमें इस मार्ग पर आगे बढ़ने से रोकती हैं।
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जब जीवन में पूर्ण गुरु का पदार्पण होता है, तब हमारे लिए साधना और भक्ति का मार्ग अति सरल हो जाता है। चूंकि गुरु अपने तपोबल से शिष्य के संचित कर्म समाप्त कर उसके प्रारब्ध की पीड़ा कम करते हैं, जिससे साधक की आध्यात्मिक उन्नति में बाधा नहीं आती है। ऐसा साधक शीघ्र ही जन्म मृत्यु के इस चक्रव्यूह से मुक्त हो जाता है। व्यासपुर आश्रम में साध्वी सुमान्या भारती ने भक्ति मार्ग के सूत्रों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि मानव को सृष्टि का सिरमौर कहा जाता है और इसका कारण व महत्त्व मानव तन के सूक्ष्म आयाम में छिपा है। हर मनुष्य के पास तीन तरह के दृष्टियां होती हैं। इनमें से दो दृष्टि स्थूल और एक सूक्ष्म स्तर पर कार्य करती हैं।
उन्होंने बताया कि भगवान शिव का तीसरा नेत्र उसी सूक्ष्म दृष्टि का प्रतीक है। हमारे शरीर में प्राणों का संचार तीन नाड़ियों से होता है, जिन्हें इड़ा, पिंगला व सुषुम्ना कहा जाता है। इड़ा को चंद्र नाड़ी, पिंगला को सूर्य नाड़ी और सुषुम्ना के द्वारा प्राणों का संतुलन होता है। स्वर विज्ञान कदाचित हमारी श्वसन प्रणाली और प्राणों की ऊर्जा के स्पंदन का विज्ञान है, जो प्राणों के संतुलन द्वारा आध्यात्मिक ऊर्जा के जागरण की विधि बताता है।
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साध्वी ने कहा कि ब्रह्मज्ञान का सीधा संबंध इसी सूक्ष्म विज्ञान से है, जो एक साधक के जीवन में सूक्ष्म स्तर पर कार्य करता है। जब ब्रह्मनिष्ठ संत एक साधक को ब्रह्मज्ञान के द्वारा आत्म साक्षात्कार करवाते हैं तो हमारी सुषुम्ना नाड़ी में प्राणों का प्रवाह बढ़ जाता है, जिससे सूक्ष्म दृष्टि भी सक्रिय हो जाती है। सत्संग में साध्वियों ने भजनों से गुरु महिमा का गुणगान किया। साध्वियों के साथ संत्सग सुनने के लिए पहुंचे श्रद्धालुओं ने भी भजन गुनगुनाकर अपनी श्रद्धा दिखाई।

 दिव्य ज्योति जागृति संस्थान आश्रम हनुमान गेट में उपस्थित श्रद्धालु। आयोजक

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