संवाद न्यूज एजेंसी
कपालमोचन। कपालमोचन मेला में पहुंचे लाखों श्रद्धालुओं ने कार्तिक पूर्णिमा एवं गुरु नानक देव जी के प्रकाशपर्व पर वीरवार रात 12 बजे कपालमोचन, ऋणमोचन व सूरजकुंड सरोवरों में मोक्ष की डुबकी लगाई। स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने सरोवरों के किनारे दीपदान किया। स्नान के लिए कपालमोचन मेला की सड़कों पर श्रद्धा का जनसैलाब उमड़ पड़ा।
भीड़ इतनी ज्यादा थी कि सड़कों पर पांव रखने तक की जगह नहीं बची। बिछड़ न जाएं इसके लिए श्रद्धालु एक दूसरे का हाथ व पल्लू पकड़ कर चल रहे थे। स्नान से ठीक पहले सुरक्षा के लिहाज से पुलिस को सतर्क कर दिया गया था। इस दौरान मेला प्रशासक एवं एसडीएम बिलासपुर जसपाल सिंह गिल ने सूचना एवं प्रसारण केंद्र के माध्यम से मेला में आए सभी श्रद्धालुओं को गुरु नानक देव जी के प्रकाश पर्व की बधाई दी।
स्नान करने के बाद श्रद्धालुओं के घर लौटने का सिलसिला शुरू हो गया। मेला प्रशासक के अनुसार सरोवरों में पांच लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने स्नान किया। श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए करीब 2500 पुलिसकर्मी लगाए गए हैं। वहीं विभिन्न विभागों के तीन हजार कर्मचारी मेला में ड्यूटी दे रहे हैं। कार्तिक पूर्णिमा का स्नान करने के लिए वीरवार को अल सुबह से ही देर रात तक मेला में श्रद्धालुओं का आना लगा रहा।
श्रद्धालु हरियाणा रोडवेज की बसों के अलावा अपने ट्रकों, कैंटरों, कारों व निजी बसों में सवार होकर कपालमोचन में आए। कपालमोचन मेला में पंजाब, हरियाणा के अलावा उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश समेत अन्य राज्यों से श्रद्धालु स्नान करने के लिए पहुंचे। जबकि हजारों श्रद्धालुओं ने चार दिनों से मेला में डेरा लगाया गया हुआ था।
मेला में आए श्रद्धालुओं ने यहां लगी दुकानों पर जमकर खरीददारी की। खरीदारी के बाद टैंट व धर्मशालाओं में ठहरे श्रद्धालुओं ने आराम किया। रात 12 बजे गुरुद्वारा साहिब पहली एवं दसवीं पातशाही से आतिशबाजी की गई। यह इस बात का संकेत था कि कार्तिक पूर्णिमा शुरू हो गई है और अब श्रद्धालु सरोवरों में स्नान व दीपदान कर सकते हैं। इसके बाद श्रद्धालु अपने टैंट व धर्मशालाओं से निकल कर स्नान करने के लिए सरोवरों की तरफ निकल पड़े।
1584 में कपालमोचन आए थे गुरु नानक देव जी
सिखों के पहले गुरु नानक देव जी 1584 में कपालमोचन में आए थे। इसके बाद संवत 1746 में भंगानी का युद्ध जीतने के बाद दसवें गुरु गोबिंद सिंह जी कपालमोचन में 52 दिन तक ठहरे थे। यहां उन्होंने कपालमोचन सरोवर में अपने अस्त्र शस्त्र धोए थे। तब गुरु गोबिंद सिंह ने ही संगत को कपालमोचन में गुरु नानक देव जी का प्रकाश पर्व मनाने का हुकम दिया था। साथ ही यह भी आशीर्वाद दिया था कि जो भी कपालमोचन में गुरु नानक देव जी का प्रकाश पर्व मनाएगा उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होंगी। कपालमोचन में एक ही परिसर में गुरुद्वारा साहिब पहली एवं दसवीं पातशाही हैं, जिनमें मेला में आए श्रद्धालु माथा टेकते हैं।
वर्जन
अब तक पांच लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं ने तीनों सरोवरों के पवित्र जल में स्नान किया। मेला सकुशल चल रहा है। शुक्रवार रात मेला का समापन हो जाएगा। अगले साल मेला के लिए इससे भी अच्छी तैयारियां की जाएंगी। - जसपाल सिंह गिल, एसडीएम एंव मेला प्रशासक।