यमुनानगर। आबकारी विभाग मे 90 लाख रुपये के डिमांड ड्राफ्ट का मामला सामने आने के बाद बड़ी वित्तीय गड़बड़ी उजागर हुई है। विभागीय रिकॉर्ड में यह राशि सरकारी खजाने में जमा दिखाई गई थी। जांच में पता चला कि ड्राफ्ट को रद्द कर उसकी राशि संबंधित फर्म के खाते में वापस जमा कर दी गई। इस मामले में आबकारी विभाग की शिकायत पर थाना शहर जगाधरी में धोखाधड़ी और अमानत में खयानत की धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज कर ली गई।
आबकारी निरीक्षक मोहन सिंह राणा ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि मैसर्स एस.एम. वाइन के एल-1 लाइसेंस से जुड़े एक ब्रीच केस के संबंध में 7 नवंबर 2023 को मामला कलेक्टर (आबकारी)-कम-संयुक्त आबकारी एवं कराधान आयुक्त, हरियाणा, पंचकूला को भेजा गया था। इस केस में फर्म की ओर से अतिरिक्त आबकारी ड्यूटी, परमिट फीस तथा स्टॉक में अंतर की राशि के रूप में 90 लाख रुपये का डिमांड ड्राफ्ट विभाग में जमा करवाया गया था। यह ड्राफ्ट आईसीआईसीआई बैंक से 8 नवंबर 2023 को जारी हुआ था।
बाद में कलेक्टर (आबकारी)-कम-संयुक्त आबकारी एवं कराधान आयुक्त, हरियाणा ने 20 नवंबर 2023 को मामले में 2 करोड़ 55 लाख 16 हजार रुपये का जुर्माना लगाया और एल-1 लाइसेंस रद्द कर दिया। इसके खिलाफ फर्म मालिक ने अदालत का दरवाजा खटखटाया, जहां से 1 दिसंबर 2023 को स्टेटस क्वो बनाए रखने के आदेश दिए गए और 4 मार्च 2024 को भी इस आदेश को आगे बढ़ा दिया गया। शिकायत के अनुसार विभागीय रिकॉर्ड में दर्शाया गया था कि 90 लाख रुपये का डिमांड ड्राफ्ट 2 दिसंबर 2023 को जीआरएन के माध्यम से भारतीय स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, जिला सचिवालय में सरकारी खाते में जमा करवाया गया है। लेकिन बाद में जांच के दौरान सामने आया कि यह राशि वास्तव में सरकारी खजाने में जमा ही नहीं हुई।
इस मामले की जानकारी मिलने के बाद उप आबकारी एवं कराधान अधिकारी (आबकारी), जगाधरी ने जांच के लिए एक कमेटी गठित की। कमेटी ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, जिला सचिवालय से जानकारी मांगी। बैंक ने लिखित में बताया कि उक्त डिमांड ड्राफ्ट को खरीदार द्वारा चालान में कुछ त्रुटियां ठीक कराने के लिए वापस ले लिया गया था। इसके बाद आईसीआईसीआई बैंक, यमुनानगर से भी जानकारी ली गई। बैंक की ओर से बताया गया कि उक्त डिमांड ड्राफ्ट को 4 दिसंबर 2023 को रद्द कर दिया गया और उसकी 90 लाख रुपये की राशि फर्म मैसर्स एस.एम. वाइन के खाते में वापस जमा कर दी गई।
मामले के सामने आने के बाद उप आबकारी एवं कराधान अधिकारी (आबकारी), जगाधरी ने 24 फरवरी 2026 को स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और संबंधित फर्म को पत्र भेजकर तीन दिनों के भीतर उक्त राशि सरकारी खजाने में जमा करवाने के निर्देश दिए थे। साथ ही चेतावनी दी गई थी कि ऐसा न करने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि मैसर्स एस.एम. वाइन के प्रोपराइटर कपिल निवासी हजरतनगर गढ़ी, जिला संभल (उत्तर प्रदेश) तथा भारतीय स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के संबंधित कर्मचारियों ने विभाग की अनुमति के बिना डिमांड ड्राफ्ट वापस कर कानून का उल्लंघन किया है। इसी आधार पर पुलिस ने थाना शहर जगाधरी में धारा 420 और 406 आईपीसी के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। संवाद