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सरस्वती के किनारे 20 रिजर्वायर विकसित : धुमन

Sat, 01 Aug 2026 01:31 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
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अ​धिकारी से बात करते बोर्ड के वाइस चेयरमैन धुमन सिंह किरमच। प्रवक्ता
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संवाद न्यूज एजेंसी
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यमुनानगर। सरस्वती नदी मॉडल परियोजना प्रदेश की अन्य नदियों के लिए भी वरदान साबित हो सकती है। सरस्वती हेरिटेज बोर्ड के वाइस चेयरमैन धुमन सिंह किरमच ने बताया कि सरस्वती नदी के किनारे अब तक करीब 20 रिजर्वायर विकसित किए जा चुके हैं। इन जल संरचनाओं के कारण इस बरसात के मौसम में करीब 200 करोड़ लीटर पानी का भूजल रिचार्ज हुआ है। वह रिजर्वायर का जायजा लेने पहुंचे थे।
उन्होने बताया कि इस परियोजना से सरस्वती नदी के आसपास के क्षेत्रों का डार्क जोन समाप्त होने में मदद मिली है। यमुनानगर जिले के छलौर गांव से लेकर बोहली गांव तक नदी के किनारे कई रिजर्वायर और सरस्वती सरोवर बनाए गए हैं। इनसे बरसाती पानी का संरक्षण होने के साथ भूजल स्तर में सुधार की संभावना बढ़ी है।
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सरस्वती नदी धार्मिक आस्था का केंद्र होने के साथ किसानों और पर्यावरण संरक्षण के लिए भी महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। आदिबद्री से रामपुर हेरियान, रामपुर कंबोयान और छलौर गांव तक करीब 350 एकड़ भूमि में सरस्वती सरोवरों की खोदाई का कार्य चल रहा है। अब तक करीब 12 लाख क्यूबिक मीटर मिट्टी का उठान किया जा चुका है। इन सरोवरों में बरसात के दौरान बड़ी मात्रा में पानी संग्रहित होकर भूजल रिचार्ज होगा।
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मुगलवाली गांव में वर्ष 2015 में सरस्वती नदी की जलधारा प्राकृतिक रूप से प्रकट हुई थी। यहां बोर्ड की ओर से करीब चार एकड़ क्षेत्र में सरस्वती सरोवर बनाया गया है, जिसमें करीब नौ करोड़ लीटर पानी के रिचार्ज की क्षमता है। वहीं छलौर में पांच एकड़ और बोहली में करीब 10 एकड़ क्षेत्र में सरोवर विकसित किए गए हैं।
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