जिला जेल जगाधरी में बंद बंदियों की स्वास्थ्य विभाग ने अब तक की सबसे बड़ी स्क्रीनिंग की। जांच के दौरान जेल में हैपेटाइटिस-सी यानि काला पीलिया से ग्रस्त 20 मरीज मिले हैं। इसके अलावा हैपेटाइटिस-बी के भी दो मरीज मिले हैं। इतना ही नहीं तीन बंदी एचआईवी पॉजिटिव मिले हैं। जेल में इतनी संख्या में बंदियों का विभिन्न बीमारियों से ग्रस्त होना हैरान करने वाला है। जो बंदी बीमार मिले हैं स्वास्थ्य विभाग की टीम ने उनका उपचार शुरू कर दिया है। इनके स्वास्थ्य पर नजर रखी जा रही है।
स्वास्थ्य विभाग की तरफ से जेल में बंदियों के स्वास्थ्य की जांच समय-समय पर की जाती है। परंतु इस जांच में उनके खून, शुगर, ब्लड प्रेशर, एलर्जी, बुखार, खांसी व जुकाम जैसे रोगों की ही जांच होती है। इस जांच से यह पता लगाया जाता है कि जेल में बंदियों का स्वास्थ्य ठीक है या नहीं। लेकिन अब स्वास्थ्य विभाग ने पहली बार इतने बड़े स्तर पर जेल में बंदियों की भयंकर रोगों की जांच की है। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने जेल में करीब 1023 मरीजों के स्वास्थ्य की जांच की। जांच के में एचआईवी पॉजिटिव तीन मरीज मिले। हैपेटाइटिस-बी के दो व सबसे ज्यादा हैपेटाइटिस-सी के 20 मरीज मिले हैं। वहीं वीडीआरएल के 14 मरीज भी मिले।
इसी जांच के दौरान ही जेल में टीबी के दो पॉजिटिव मरीज भी मिल हैं। इनके अलावा 97 बंदियों में टीबी के लक्षण मिले हैं। टीबी पॉजिटिव मरीजों की दवा शुरू करके उन्हें अन्य बंदियों से अलग रखा गया है। जेल में बंदियों की एक्सरेज जांच कराने के लिए मेदांता अस्पताल से विशेष रूप से बस मंगवानी पड़ी थी। इस बस में बंदियों की एक्सरे जांच कराने में तीन दिन लगे थे। डॉक्टरों ने जेल के स्टाफ को हिदायत दी है कि वह बंदियों के बालों की कटिंग व शेविंग के दौरान बार्बर को नए ब्लेड का का इस्तेमाल करें। इसमें लापरवाही अन्य बंदियों पर भी भारी पड़ सकती है।
स्वास्थ्य विभाग के टीबी के नोडल अधिकारी डॉ. अनुप गोयल ने बताया कि जेल में पहली बार इतने बड़े स्तर पर बंदियों की जांच की गई है। इनमें हैपेटाइटिस-सी के 20, हैपेटाइटिस-बी के दो व एचआईवी पॉजिटिव तीन बंदी मिले हैं। इनके अलावा टीबी के भी मरीज मिले हैं। सभी बंदियों का उपचार शुरू कर दिया है।