निजी वाहनों में ढोए जा रहे स्कूली बच्चे, रोड सेफ्टी की गाइड लाइन पूरी नहीं, पांच के चालान
वाहन का ना था पीला रंग, ना ही था स्कूल का नाम व फोन नंबर, क्षमता से अधिक भरे हुए थे बच्चे
यमुनानगर। जिले में सड़कों पर हो रहे हादसों से निजी स्कूल संचालक व पेरेंट्स कोई सबक नहीं ले रहे। ना ही रोड सेफ्टी की गाइडलाइन पर खरे उतर रहे है। इसी के चलते सोमवार को स्कूलों के बाहर कई निजी वाहन स्कूली बच्चों को अनियमितताओं के बीच छोड़ने का कार्य करते दिखे। हैरानी की बात है कि निजी वाहनों में क्षमता से अधिक स्कूली बच्चों को बिठाया जा रहा है। इसका खुलासा ट्रैफिक पुलिस की जांच में हुआ। पुलिस ने रोड सेफ्टी की गाइड लाइन को पूरा न करने व नियमों को उल्लंघन करने पर पांच निजी वाहनों के चालान किए। इन वाहनों ने स्कूली बच्चों को स्कूल से लाया जा रहा था। लेकिन ये वाहन रोड सेफ्टी की गाइड लाइन को पूरा नहीं कर रहे।
ट्रैफिक पुलिस के मुताबिक जिले में स्कूली बच्चों को लाने और ले जाने में लगे अधिकतर निजी वाहन नियमों को पूरा नहीं करते हैं। नियमों के तहत स्कूल बसों व स्कूल वाहन का रंग पीला होना चाहिए। दोनों तरफ स्कूल का नाम लिखना और दूरभाष नंबर अनिवार्य है। बस की खिड़कियों पर ग्रिल, बस के भीतर फर्स्ट ऐड बॉक्स, सीसीटीवी और जीपीएस सिस्टम सहित चालक और परिचालक के पास लाइसेंस व वर्दी होना अनिवार्य है। इन नियमों को पूरा करने वाले वाहनों को ही क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी पास करता है। लेकिन जिले के कई निजी स्कूलों में अभी भी ऐसे वाहनों से बच्चों को ढोया जाता है। जो रोड सेफ्टी के नियमों को पालन नहीं करते। इसी तरह के वाहनों पर शिकंजा कसने के लिए ट्रैफिक पुलिस ने सोमवार को अभियान चलाया। जिसके तहत शहर के बीच से निकल रहे हाइवे पर दौड़ रहे पांच स्कूली वाहनों का चालान किया गया। इन वाहनों का रंग न तो पीला था और नहीं किसी स्कूल का नाम लिखा हुआ था। बस वाहन के अंदर स्कूली बच्चे थे। वाहनों में बच्चे भी ठूंस ठूंस कर भरे हुए थे।
वर्जन
ट्रैफिक प्रभारी इंस्पेक्टर यादवेंद्र सिंह ने बताया कि निजी स्कूल वाहनों की चेकिंग की गई है। उन्होंने निजी चालकों को नियमों का पालन करने के निर्देश दिए। स्कूली बच्चों में क्षमता से अधिक बच्चे भरे हुए थे। ऐसे पांच वाहनों के चालान किए गए। ये अभियान नियमित जारी रहेगा। इसके अलावा ऑटो और वाइट कलर के वाहन जांचे गए। उन्होंने पेरेंट्स से आह्वान किया कि नियमों को पूरा करने वाले येलो कलर वाहन में ही अपने बच्चों को भेजे।
फोटो : 42