किसान बोले- एक सप्ताह तक लोकतंत्र में होगी बात, फिर चलेगा लट्ठ
- एसडीएम व केन वाइस प्रेजीडेंट ने किसानों से मांगा एक सप्ताह का समय
- चढूनी व एसडीएम के बीच हुई वार्ता, कहा एक सप्ताह में सारी पेमेंट निपटा देंगे
अमर उजाला ब्यूरो
यमुनानगर।
बकाया पेमेंट को लेकर शुक्रवार को भाकियू से जुडे़ किसान पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस में एकत्रित हुए और जमकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। किसान गन्ने की पेमेंट के भुगतान को लेकर शुगर मिल को ताला लगाना चाहते थे, लेकिन मौके पर बैठक करने के बाद रेस्ट हाउस में ही मिल प्रबंधक व एसडीएम जगाधरी पहुंचे और किसानों से बातचीत की। उसके बाद किसानेां व अधिकारियों में सहमति बनी और किसानों ने सरकार को अब एक सप्ताह का समय दिया है। यदि एक सप्ताह के अंदर गन्ने की सारी पेमेंट का भुगतान नहीं किया तो किसान सचिवालय के सामने हाईवे को जाम कर बैठ जाएंगे। जिसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी।
भारतीय किसान यूनियन के नेता गुरनाम सिंह चढूनी व प्रदेश सचिव हरपाल के नेतृत्व में किसान रेस्ट हाउस यमुनानगर में इकट्ठा हुए। मौके पर भारी पुलिस बल लगाया गया, ताकि किसान शुगर मिल को ताला न लगा सके। मौके पर किसानों से बातचीत करने शुगर मिल प्रबंधक डीपी सिंह व एसडीएम जगाधरी मौके पर पहुंचे। काफी देर बातचीत के बाद आखिरकार किसानों ने एक सप्ताह का समय प्रशासन को दिया है, ताकि वह भुगतान कर सके। शुगर मिल प्रबंधकों ने किसानों के खाते में 18 करोड़ रुपये डाल दिए। उसके बाद अब बाकि बची करीब 40 करोड रुपये की पेमेंट सरकार केा करनी है। इसके लिये एसडीएम ने किसानों से समय मांगा है। किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि किसानों को अपनी फसल के पैसे ही समय पर नहीं मोिल है। उन्होंने कहा कि अगले शुक्रवार तक लोकतंत्र के माध्यम से बात होगी और उसके बाद सोमवार को लठतंत्र से बात होगी। प्रशासन लठ बजाएगा और हम लठ खाएंगे। लेकिन मिल को ताला भी लगेगा और हाईवे पर जाम भी लगाया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार जल्द से जल्द किसानों का भुगतान करे, वरना किसान आंदेालन ऐसा खड़ा कर देगें, कि सरकार हिल जाएगी। सरकार पर एक सप्ताह का समय है। भाकियू के जिला प्रधान संजू गुदियाना ने बताया कि किसानों ने जैसे तैसे संघर्ष कर श्ुागर मिल से गन्ने के पेमेंट का भुगतान करवा लिया गया है। अब सरकार ने गन्ने की पेेमेंट का बाकि भुगतान करना है। इसलिए किसानों से बातचीत करने के लिये एसडीएम मौके पर आए र्थे। यदि प्रशासन नहंी आता तो वह शुगर मिल को ताला जड़ देते। यदि एक सप्ताह के अंदर किसानों का भुगतान नहीं हुआ तो किसान सोमवार को सचिवालय के सामने जाम लगाकर बैठ जाएंगे। इस मौके पर बलिंद्र, मंदीप, विक्रांत, गुरनाम, गुरमुख, महेश और जोगध्यान मौजूद रहे।
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चढूनी बोले- डीपी सिंह की हर बात गोल
बकाया पेमेंट को लेकर शुगर मिल की तालाबंदी को लेकर हुए एकत्रित हुए लेकिन प्रशासन से हुई बात के बाद शुगर मिल की ताला बंदी नहीं की गई। किसानों के नेता गुरुनाम सिंह चढूनी ने कहा कि डीपी सिंह की हर बात में गोल है कोई बात सटीक नहीं करते।
मिल को पहली नवंबर से आरंभ करें
शुगर मिल वाइस प्रेजीडेंट से हुई वार्ता के दौरान किसानों ने मिल को जल्द से जल्द खोले जाने की मांग की। किसानों ने कहा कि जल्द से जल्द मिल को आरंभ कराया जाए, ताकि किसान समय से अपना गन्ना मिल में डालना आरंभ कर दें।
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चार माह से फंसी किसानों की बकाया पेमेंट
दरअसल, 15 हजार किसानों की 88 करोड़ रुपये गन्ने की बकाया पेमेंट चार माह से फंसी हुई है। पेमेंट को लेकर किसान डीसी, विधायक, स्पीकर, कृषि मंत्री व मुख्यमंत्री से मिल चुके थे। बावजूद इसके पेमेंट नहीं हो पाई, जिसके बाद किसान रोषित हो उठे। पेमेंट को लेकर किसान कई बाद महापंचायत कर चुके है लेकिन हर बार प्रशासन द्वारा किसानों को लॉलीपॉप देकर शांत कर दिया जाता है।
वर्जन
हमने सब क्लीयर कर दिया: सिंह
सरस्वती शुगर मिल के वाइस प्रेसिडेंट डीपी सिंह का कहना है कि शुगर मिल की तरफ किसानों के गन्ने की पेमेंट जो बकाया था, वह पेमेंट 18 करोड़ रुपये किसानों के खाते में डाल दिए गए हैं। बाकि बची गन्ने की पेमेंट सरकार को करनी है और वह पेमेंट सरकार सीधे किसानों के खाते में देगी। अब शुगर मिल की तरफ कोई बकाया नहीं है। यदि सरकार चाहे तो जल्द ही किसानों की पेमेंट कर सकती है। शुगर मिल ने किसान का हिसाब कर दिया है।
फोटो नंबर-17,18