फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अवैध माइनिंग के खेल में माफिया ही नहीं क्रशर, ट्रांसपोर्टर और ठेकेदार भी काट रहे चांदी

विज्ञापन
विज्ञापन
अमर उजाला एक्सक्लूसिव
विज्ञापन


माफिया ही नहीं क्रशर, ट्रांसपोर्टर और ठेकेदार भी काट रहे चांदी
निरंजन कुमार राणा
यमुनानगर। जिले में अवैध रूप से किए जा रहे खनन पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। फर्जी फर्म के बिल पर निकाले जा रहे ओवरलोड ट्रकों ने इस पर फिर मुहर लगा दी है। अवैध माइनिंग में माफिया ही नहीं क्रशर संचालक, ट्रांसपोर्टर और ठेकेदार भी चांदी काट रहे हैं। अमर उजाला के हाथ ऐसे सबूत लगे हैं। इनकी जांच करवाई जाएं तो यमुनानगर में माइनिंग में लाखों नहीं बल्कि करोड़ों रुपये का घोटाला सामने आ सकता है। इतना ही नहीं यह पूरा गोरखधंधा राजनीतिज्ञ लोगों के संरक्षण में चल रहा है। कलेसर से लेकर ताजेवाला और गुमथला राव तक फर्जी बिलों के साथ फर्जी रायल्टी पर्चियों का खेल खेला जा रहा है। माइनिंग विभाग की रायल्टी की पर्चियों की जांच क्यों नहीं की जाती।

पर्ची अंडरलोड, ट्रक ओवरलोड
अमर उजाला के हाथ कुछ ऐसी पर्चियां भी लगी हैं, जिनसे रॉयल्टी अंडरलोड के हिसाब से लिखी गई है, जबकि संबंधित ट्रक ओवरलोड साफ दिखाई देता है। इससे सरकार को रॉयल्टी और टैक्स के रूप में प्रति ट्रक आठ से दस हजार रुपये के राजस्व का नुकसान पहुंचाया जाता है। सीजन में रोजाना तीन से चार हजार वाहन निकलते हैं। इस हिसाब से यह राशि करोड़ों में पहुंचती है।
विज्ञापन


जहां रोक, वहां भी खनन
एनजीटी की हिदायतों के अनुसार कलेसर नेशनल पार्क व हथिनीकुंड बैराज के आसपास खनन नहीं किया जा सकता। इसके लिए बाकायदा गाइडलाइन जारी हैं, लेकिन ताजेवाला एरिया में यूपी व हरियाणा दो राज्यों के बीच यमुना नदी इस लूट की खुली गवाह बनी हुई है। यहां पर न केवल खनन अवैध हो रहा है बल्कि रायल्टी के नाम पर गेट पास लिखी फर्जी पर्चियां काट कर वसूली भी हो रही है। इसके लिए बकायदा अराईयांवाला में रायल्टी वसूलने के नाम पर नाका भी लगाया गया है। इन गेट पास पर्चियों को किसी भी ट्रक व ट्रैक्टर-ट्राली वाले को रोक कर उनसे देखा जा सकता है, लेकिन खनन, टैक्स व पुलिस डिपार्टमेंट को इसकी भनक तक नहीं है।

बाहर लगाया जाता है स्टॉक
हर रोज यमुना और आसपास के इलाके में अवैध खनन होता है। यहां से रेत-बजरी पत्थर निकाल कर गांव के बाहर स्टाक कर लिया जाता है उसके बाद फिर शाम को उसको गाड़ियों में लोड किया जाता है। हजारों लाखों फीट माल बाहरी राज्यों में जाता है। कई बॉर्डर क्रॉस किए जाते हैं, इसके बावजूद धड़ल्ले से यह गोरखधंधा चल रहा है।
अवैध रूप से चल रहे हैं क्रशर औ स्क्रीनिंग प्लांट
जिले में कई क्रशर व स्क्रीनिंग प्लांट अवैध रूप से चल रहे हैं जिनके पास कोई एनओसी नहीं है। अधिक दबाव पड़ने पर अधिकारी कभी कभार इनको सील कर जाते हैं। उसके बाद फिर से सीलें तोड़ कर काम शुरू हो जाता है। अराईयांवाला नाके के पास पुल की खस्ता हाल को देखकर उस पर लगाए गए बैरीकेड को भी लगभग एक माह पूर्व खनन माफिया ने तोड़ दिया है। अब इस पुल से वाहन गुजरने लगे है।

इसलिए हो रही है अनदेखी
अवैध खनन की अनदेखी की सब से बड़ी वजह है। इसमें होने वाला भारी मुनाफा। लागत के मुकाबले इस धंधे में कई गुना लाभ है। पुलिस, प्रशासन, नेताओं को मुनाफे का हिस्सा देने के बावजूद इससे जुड़े लोग जल्द ही करोड़पति हो जाते हैं।

अवैध माइनिंग और ओवरलोड के खिलाफ प्रशासन सख्त है। सख्ती का कही नतीजा है कि इनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है और लगातार एफआइआर दर्ज करवाई जा रही है। दिनरात हम फिल्ड में चेकिंग कर रहे हैं।
विज्ञापन

-ओमदत्त शर्मा, माइनिंग इंस्पेक्टर

ओवरलोड के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी गई है। दो दिन में 57 वाहनों को पकड़कर उन पर साढ़े सत्ताइस लाख रुपये का जुर्माना किया गया। यह अभियान लगातार जारी रहेगा।
-सुनीता गुप्ता, एआरटीए, यमुनानगर

फोटो नंबर 39, 40
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें