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रोडवेज चक्का जाम: 154 में से 32 बसों को चुपके से निकाला, 122 नहीं दी चलने, जनता हलकान

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रोडवेज चक्का जाम: 154 में से 32 बसों को चुपके से निकाला, 122 नहीं दी चलने, जनता हलकान
- जीएम ने रोडवेज वर्कशॉप की बजाय जगाधरी बस स्टैंड पर खड़ी करा दी थी बसें, भौर होते ही करवा दी रवाना - रोडवेज यूनियन नेता पहुंचने से पहलेे जा चुकी थी बसें, कर्मियों व अधिकारी में हुई बहस
-बस स्टैंड के पास लगाई थी धारा 144, प्रशासन ने मौके पर लगाए 13 मजिस्ट्रेट व तैनात रहा पुलिस बल
- बसों का संचालन बंद होने से इधर-उधर परेशान होते रहे यात्री, नहीं मिला कोई साधन
- चक्का जाम से प्राइवेट वाहन संचालकों की आई मौज, दोगुना वसूला किराया
अमर उजाला ब्यूरो
यमुनानगर। रोड सेफ्टी बिल व 720 बसों को ठेके पर लेने के विरोध में मंगलवार को रोडवेज बसों का चक्का जाम रहा। हालांकि रोडवेज यूनियनों ने बसों को पूर्णरूप से बंद करने का ऐलान किया था। मगर रोडवेज जीएम ने प्लानिंग के तहत हड़ताल को फेल करने का प्रयास किया। उन्होंने बसों को वर्कशॉप में लाने की बजाय सोमवार रात को ही जगाधरी बस स्टेंड पर ही खड़ी करवा दी थी। भौर होते ही चुपके से 32 बसों को रुटों पर भिजवा दिया। भनक लगते ही कर्मचारी पहुंच गए। इसी को लेकर कर्मियों व जीएम में बहस हो गई। इसके बाद कर्मचारियों ने एक भी बस चलने नहीं दी। ऐसे में 122 बसें दिनभर वर्कशॉप व बस स्टैंड के अंदर खड़ी रही। उधर बसों के बंद होने से जनता हलकान रही।
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चक्का जाम से रोडवेज को लगा जबरदस्त चूना
बता दें कि यमुनानगर डिपो में 161 बसें हैं जिनमें 154 बसें ऑन रूट रहती हैं। इन्हीं बसों से रोजाना की 14 लाख रुपये इनकम होती है। लेकिन हड़ताल का इनकम पर जबरदस्त असर पड़ा। केवल 32 बसें ही चल पाई, जबकि 122 बसें डिपो व वर्कशॉप में ही खड़ी रही। डिपो के ठोस सूत्रों के अनुसार साढ़े 13 लाख रुपये का नुकसान होने का अनुमान है। उधर चक्का जाम होने से प्रशासन ने धारा 144 लगा दी थी। वहीं 13 मजिस्ट्रेट लगाए गए तथा किसी भी स्थिति से निपटने के लिए मौके पर वाटर कैनन, फायर ब्रिगेड तथा पुलिस बल तैनात किया गया था।

बसें बंद होने से परेशान रहे यात्री
रोडवेज चक्का जाम का यात्रियों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ा। यात्री बस पकड़ने के लिए यमुनानगर व जगाधरी बस स्टेंड पर आए जरूर, लेकिन बस न मिलने से निराश लौटे। कुछ यात्री बस चलने की उम्मीद से बस स्टेंड पर बैठे रहे। तो कुछ ने ट्रेन का सहारा लिया। सबसे ज्यादा दिक्कत बुजुर्गों को उठानी पड़ी, क्योंकि वापस लौटने के लिए अलग से कोई वाहन नहीं था। ऐसे में अतिरिक्त किराया खर्च कर जाना पड़ा।

पता होता नहीं आता बस स्टैंड
यमुनानगर पर बस का इंतजार कर रहे सहारनपुर के रिंकू का कहना था कि रोडवेज की हड़ताल के बारे में उसे कोई जानकारी नहीं थी। अगर पता होता तो वह नहीं आता। मंगलवार को उसने फतेहाबाद टॉफी फैक्टरी में जाना था, जहां वह काम करता है। अब अतिरिक्त पैसे खर्च कर वापस अपने घर सहारनपुर जाएगा।

हड़ताल से हुई गाड़ी मिस
यमुनानगर की रानी बताती हैं कि उसे यमुनानगर से बस पकड़ कर अंबाला कैंट रेलवे स्टेशन जाना था। वहां से वह कानपुर के लिए ट्रेन पकड़नी थी जोकि डेढ़ बजे थी। क्योंकि कानपुर में उसे रेलवे का पेपर देने जाना था जोकि गुरुवार को होना है। लेकिन बस न मिलने के कारण काफी दिक्कत हुई।

बेटी का पूछने आए थे हालचाल
कुरुक्षेत्र के रहने वाले अमर चंद व शिमला देवी ने बताया कि यमुनानगर के निजी अस्पताल में बेटी की डिलीवरी हुई है। उसका हालचाल जानने के लिए वह आए थे। वापस जाने के लिए बस स्टेंड पर एक घंटे से बैठे हैं बसें भी खड़ी थी। लेकिन किसी ने बताया कि हड़ताल होने से बसें नहीं चलेगी।

प्राइवेट वाहनों की रही मौज, मनमर्जी का वसूला किराया
हड़ताल से जहां यात्रियों को दिक्कत हुई, वहीं दूसरी तरफ प्राइवेट वाहनों के लिए हड़ताल राहत लेकर आई। उनके लिए हड़ताल सोने पे सुहागा से कम नहीं थी। इस दौरान उन्होंने यात्रियों की मजबूरी फायदा उठा मनमर्जी का किराया वसूला। यहां तक वाहनों में ठूंस-ठूंस कर सवारियों को ढोया। वहीं यात्रियों में भी गंतव्य पर जाने के लिए होड़ मची हुई थी। कई यात्रियों में तो वाहन में बैठने के लिए नोंक-झोंक भी हुई।

4 यूनियन ने दिया समर्थन, एक ने किया किनारा
बता दें कि रोडवेज कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति चक्का जाम केंद्रीय फेडरेशनों के आह्वान पर मोटर व्हीकल संशोधन एक्ट-2017 के विरोध में किया है। इस दौरान डिपो की पांच यूनियनों में से हरियाणा रोडवेज वर्कर्स यूनियन संबंधित सर्व कर्मचारी संघ, हरियाणा रोडवेज वर्कर यूनियन संबंधित इंटक, रोडवेज कर्मचारी यूनियन हरियाणा व हरियाणा परिवहन कर्मचारी संघ चार यूनियनों ने हड़ताल का समर्थन किया, जबकि ऑल हरियाणा रोडवेज वर्कर यूनियन ने हड़ताल से किनारा किया।

पंजाब रोडवेज की बसें भी नहीं निकलने दी बाहर
चक्का जाम के दौरान यमुनानगर बस स्टेंड पर पंजाब रोडवेज की 11 बसें भी डिपो में 24 घंटे तक खड़ी रही। कर्मचारियों ने बस डिपो से बाहर न निकले, सुबह ही एक बस को बस स्टेंड के एंट्री गेट पर ही खड़ा कर दिया था। नवा शहर डिपो के परिचालक नितीश, नंगल डिपो के कंडक्टर प्रदीप कुमार व ड्राइवर बलबीर सिंह ने बताया कि बसें सुबह के पौने पांच बजे से खड़ी हैं। उन्होंने बसों को बस स्टेंड से बाहर निकालने की कोशिश की थी मगर रोडवेज कर्मचारियों ने उन्हें रोक दिया।

आधी रात को ही आ गए थे कर्मचारी
बता दें कि चक्का जाम सोमवार की रात 12 बजे से शुरू हो गया था, जोकि मंगलवार रात 12 बजे तक चला। वहीं यूनियन नेता आधी रात को ही यमुनानगर बस स्टेंड पर आ गए थे, ताकि बस स्टेंड से कोई बस न निकल सके। कर्मचारियों ने अलसुबह ही वर्कशॉप व बस स्टेंड के बाहर ही खड़े हो गए थे।

पूर्णरूप से बंद रही बसें : वरयाम सिंह
रोडवेज कर्मचारी यूनियन हरियाणा संबंधित महासंघ के जिला प्रधान वरयाम सिंह सैनी ने कहा कि रोडवेज का चक्का जाम के दौरान बसें पूर्णरूप से बंद रही। कर्मचारियों ने शांतिपूर्ण से धरना देकर रोष प्रकट किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार रोडवेज का निजीकरण करने के लिए तूली हुई, लेकिन रोडवेज का कर्मचारी ऐसा होने नहीं देगा। सरकार 720 बसों को ठेके पर लेने की बात कह रही है जबकि सरकार को चाहिए था कि वह रोडवेज में ही बसों की संख्या बढ़ानी चाहिए, लेकिन सरकार की मंशा कुछ ओर ही है।
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हड़ताल का बस सर्विस पर कोई असर नहीं पड़ा है। हमने 32 बसों को सुबह ही जगाधरी बस स्टेंड से निकाल दिया था, ताकि यात्रियों को दिक्कत न आए। हड़ताल से डिपो की इनकम पर असर पड़ा है। बुधवार सुबह सभी बसों को पूर्णरूप से संचालन हो जाएगा।
-रविंद्र प्रसाद पाठक, महाप्रबंधक, रोडवेज, यमुनानगर।
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