महाशिवरात्रि में शुभ मुहुर्त पर जलाभिषेक करना होगा अत्यंत सुखदायी
- कांवड़ियों के लिए जल चढ़ाने के पुख्ता इंतजाम, प्रशासन ने पूरी की तैयारी
अमर उजाला ब्यूरो
यमुनानगर। महाशिवरात्रि में शुभ मुहूर्त पर जलाभिषेक करना अत्यंत सुखदायी होगा। श्रावण माह में भोले शंकर पर रुद्राभिषेक करने से भगवान आशुतोष प्रसन्न होते हैं और दुख दूर करते हैं। इसी के साथ महाशिवरात्रि के मद्देनजर नगर के सभी शिवालयों को भव्य तरीके से सजाया गया है और कांवड़ियों के लिए जल चढ़ाने के लिए पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।
शिव की पूजा का सावन में अपना ही विशेष महत्व है, यदि कोई भक्त पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ भगवान शिव की आराधना सावन के महीने में करता है तो भोलेनाथ उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं। सावन का माह भोले बाबा को अति प्रिय है। श्रावण माह की महाशिवरात्रि नौ की रात्रि में पड़ रही है और जलाभिषेक करने का शुभ मुहूर्त भी रात्रि के समय ही है।
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जल चढ़ाने का शुभ मुहूर्त
पंड़ित श्याम सुंदर शास्त्री ने बताया कि गुरुवार को शिवरात्रि निशिथ काल पूजा का समय मध्य रात्रि 12 बजकर 4 मिनट से 12 बजकर 47 मिनट तक है। इससे व्रत पारण का समय दस अगस्त को प्रात: 5 बजकर 48 मिनट से तीन बजकर 44 मिनट तक रहेगा। चतुर्दश तिथि का प्रारंभ नो अगस्त रात्रि 22:45 से प्रारंभ होगा, जिसका समापन दस अगस्त को 19:07 पर रहेगा। शुक्रवार दस अगस्त को सावन शिवरात्रि पारण का समय सुबह पांच बजकर 51 से 15:42 तक रहेगा। इस समय अतिरिक्त सुबह चार बजे से रात्रि आठ बजे तक जलाभिषेक का उत्तम समय बना गया है।
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बिना अभिषेक पूर्ण नहीं मानी जाती पूजा
शिवरात्रि पर बिना अभिषेक शिव पूजा अधूरी मानी जाती है, इसलिए शिवरात्रि व सोमवार का व्रत अभिषेक का अलग ही महत्व है। इसलिए सावन की शिवरात्रि में भक्तगण अपनी-अपनी श्रद्धानुसार शिव जी का अभिषेक करें। यह अभिषेक जल, दूध, पंचामृत या रुद्राभिषेक के रूप में किया जा सकता है।