औरंगाबाद डेयरी कॉम्प्लेक्स : कॉमर्शियल प्रोजेक्ट, हालात बाड़े जैसे
- पौने दो लाख के प्लॉट के लिए भेजा 6.92 लाख रुपये का प्रॉपर्टी टैक्स
अमर उजाला ब्यूरो
यमुनानगर।
शहर से 10 किमी दूर औरंगाबाद गांव में बनाए गए डेयरी कॉम्प्लेक्स में हालात बदतर हैं। 14 साल में प्रशासन यहां सबसे जरूरी पानी, बिजली और गलियों की व्यवस्था तक नहीं करवा पाया। नगर निगम ने विकास के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च कर दिए, लेकिन धरातल पर कोई काम दिखाई नहीं देता। जब अमर उजाला ने रियल्टी चेक किया तो हालात बद से बदतर मिले। बड़ी वजह यही मानी जा रही है कि डेयरी संचालक यहां शिफ्ट नहीं होना चाहते। यहां 9 एकड़ दो कनाल में 109 प्लाट काटे गए, लेकिन अभी तक एक दर्जन डेयरियां भी यहां शिफ्ट नहीं हो सकी हैं।
प्लाट पौने दो लाख का और प्रॉपर्टी टैक्स 6.92 लाख : डेयरी संचालकों की परेशानी इन दिनों और भी बढ़ गई है। निगम की ओर से कांप्लेक्स में डेयरी संचालकों को प्रापर्टी टैक्स नोटिस भी भेज दिए गए हैं। राजकुमार का 446 गज प्लाट का प्लाट है। जिसकी कीमत उन्होंने पौने दो लाख दी थी, लेकिन हाल ही में नगर निगम की ओर से 6 लाख 92 हजार रुपये का नोटिस मिला है।
यह नगर निगम का कॉमर्शियल प्रोजेक्ट है। कॉमर्शियल प्रोजेक्ट की पहली शर्त पेयजल पाइप लाइन और निकासी के लिए सीवरेज पाइप लाइन होती है। 14 साल से प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है, लेकिन यहां पर न तो पेयजल पाइप लाइन डाली गई और न ही सीवरेज लाइन।
नाले कहां है किसी को नहीं पता : नगर निगम की ओर से पानी निकासी के लिए कॉम्प्लेक्स के बाहर दो होद और उससे आगे नाले का निर्माण करवाया गया है, लेकिन होद तक गंदे पानी आने के लिए नालियां ही नहीं है। होद भर कर ओवरफ्लो हो गए हैं और गंदा पानी कांप्लेक्स में ही फैल रहा है।
जेनरेटर से चलते हैं सबमर्सिबल : पेयजल आपूर्ति के लिए नलकूप लगाने के लिए कमरा बनाया गया, लेकिन यहां नलकूप नहीं लगाया गया। ऐसे में नलकूप के कमरे में लगे ताले पर भी जंग लग गया है। डेयरी संचालकों ने सबमर्सिबल लगाएं, लेकिन फिर बिजली की कमी आड़े आ गई तो महंगे जेनरेटर लेने पड़े।
डेयरी संचालकों की मांग : मिल्क डेयरी वर्कर यूनियन के प्रधान बेअंत सिंह भाटिया का कहना है कि नगर निगम के अधिकारी सुनते नहीं, विधायक कोई समाधान करवा नहीं पाएं। ऐसे में हम किसके पास गुहार लगाएं समझ में नहीं आता। पहले यहां निकासी, पक्की सड़कें, स्ट्रीट लाइट व सफाई व डॉक्टर की सुविधाएं उपलब्ध करवाएं। तभी डेयरी कॉम्पलेक्स में जाना संभव होगा।
इतना ज्यादा प्रॉपर्टी टैक्स भरने की बजाय हम अपना प्लॉट सरेंडर करना पसंद करेंगे। यहां ग्रामीण फीडर से ही बिजली सप्लाई होती है और दिन के समय केवल दो घंटे मिलती है। जेनरेटर का अतिरिक्त खर्चा हो रहा है। -साहिल
यहां हालात खराब हैं। सरकार डेयरी को कृषि क्षेत्र में बताती है। जबकि नगर निगम ने कॉमर्शियल प्रोजेक्ट बता कर भारी भरकम प्रॉपर्टी टैक्स भेज दिया। यह गलत है। -सुमित
संबंधित विभागों के अधिकारियों से मीटिंग की जा रही है। उन्हें डेयरी कॉम्पलेक्स में अपने विभाग के कार्य पूरे करने को कहा गया है। बिजली, पानी व पशुपालन विभाग की तरफ से व्यवस्था शुरू करवाई जाएगी। -अनिल नैन, चीफ सेनिटरी इंस्पेक्टर
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