‘मेरे लाल को क्लास में बैठने नहीं दिया, हमें धक्के देकर स्कूल से निकाला’
प्रिंसिपल की सफाई, सभी स्टूडेंट मेरे बच्चे जैसे, परिवारवालों के आरोप झूठे
अमर उजाला ब्यूरो
यमुनानगर। मेरे मासूम बेटे का कसूर सिर्फ इतना था कि वह कुछ दिन स्कूल नहीं जा सका। स्वस्थ होने पर जब वह स्कूल में गया तो मेरे लाल को क्लास में नहीं बैठने दिया गया। मैं साथ गई तो प्रिंसिपल ने एक नहीं सुनी और मां-बेटे को धक्के देकर स्कूल से निकाल दिया। अपने 16 साल के जवान बेटे को खो चुकी गांव दड़वा निवासी उसकी बेबस मां अजमेर कौर के आंखों से आंसू नहीं सूख रहे। उसने बताया कि मैंने प्रिंसिपल के सामने हाथ भी जोड़े, लेकिन हमें स्कूल से बाहर निकाल दिया। इसके बाद हम घर आ गए। सन्नी को बेइज्जती महसूस हुई और उसने शाम को जहर निगल लिया। रात करीब आठ बजे हमने देखा कि वह बाहर खड़ा उलटी कर रहा था। उसकी हालत देखकर हम उसे तुरंत यमुनानगर सिविल अस्पताल ले गए, जहां रात भर उपचार के बाद उसकी मौत हो गई। दोपहर बाद शव का पोस्टमार्टम कर परिजनों के हवाले किया गया। बच्चे का गांव के श्मशानघाट में अंतिम संस्कार किया गया। सन्नी की अंतिम यात्रा में पूरा गांव शामिल दिखाई दिया।
ग्रामीणों में रोष : घटना को लेकर ग्रामीणों में भी काफी रोष है। शुक्रवार को फिर से ग्रामीण स्कूल में पहुंच सकते हैं। हालांकि पुलिस की तरफ से स्कूल के बाहर फोर्स तैनात रहेगी ताकि ग्रामीण फिर से कोई हंगामा न करें।
प्रिंसिपल की सफाई : वहीं प्रिंसिपल मंजीत कौर ने सफाई दी कि सभी स्टूडेंट उसके बच्चे जैसे हैं। हम बच्चों को हाथ भी नहीं लगा सकते। जबकि धक्के देना तो बहुत दूर की बात है। मैंने सिर्फ इतना कहा था कि ग्रीष्मकालीन छुट्टियों के बाद एडमिशन दे दिया जाएगा। सन्नी अप्रैल से ही स्कूल नहीं आ रहा था। अगर बीमार था तो पेरेंट्स इसकी जानकारी स्कूल में देते।
इस संबंध में जिला शिक्षा अधिकारी आनंद चौधरी का कहना है कि घटना दुखद है। बच्चे को क्लास में न बैठने देना निंदनीय है। कोई भी प्रिंसिपल बच्चे को एडमिशन न देने या बच्चे को बिना वजह कक्षा से बाहर नहीं निकाल सकती।
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