253 बैंक शाखाओं के 2772 कर्मचारी दो दिन हड़ताल पर, अटका 1792 करोड़ का लेनदेन
- चेक क्लीयरिंग, पैसे जमा कराने व निकलवाने जैसी सेवाएं प्रभावित, उपभोक्ता रहे परेशान
- यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन (यूएफबीयू) के आह्वान पर हड़ताल पर रहे बैंक कर्मी, आल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस ने भी दिया समर्थन
अमर उजाला ब्यूरो
यमुनानगर। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन (यूएफबीयू) के आह्वान पर मंगलवार को जिले के सरकारी बैंकों से जुड़े 2772 कर्मचारी बुधवार को दो दिन की राष्ट्रव्यापी हड़ताल में शामिल हुए। कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने से जिले की 253 बैंक शाखाओं पर पूरे दिन ताले लटके रहे। हालांकि कर्मचारी अंदर बैठे रहे, लेकिन काम नहीं किया। इससे चेक क्लीयरिंग, पैसे जमा कराने, ड्राफ्ट बनाने व निकलवाने जैसी सेवाएं प्रभावित रहीं। हड़ताल से बैंक शाखाओं में एक दिन में जहां 896 करोड़ रुपये का लेनदेन अटक गया, वहीं दो दिन में 1792 करोड़ का लेनदेन प्रभावित होगा। कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने से उपभोक्ता का खासी परेशानी का सामना करना पड़ा। बैंकों पर लटके ताले व हड़ताल संबंधित बोर्ड देख उपभोक्ता उल्टे पांव लौटने को मजबूर हुए। बैंकों के एटीएम बूथों पर सुबह से दोपहर तक लोगों की भीड़ रही वहीं, शाम तक अधिकांश एटीएम में कैश खत्म हो गया। हड़ताल के दूसरे दिन वीरवार को उपभोक्ताओं की परेशानी और बढ़ सकती है।
तीन किलोमीटर का पैदल मार्च : सुबह साढ़े 11 बजे कर्मचारी रेलवे रोड पर आ गए। यहां से पैदल रोष मार्च निकालते हुए सभी कर्मचारी महावीर चौक से होते हुए रेलवे स्टेशन चौक पर पहुंचे। यहां से वापस जगाधरी रोड से होते हुए शहीद भगत सिंह चौक पर पहुंचे और प्रदर्शन किया। करीब डेढ़ बजे तक हड़ताली बैंककर्मी धरना स्थल पर बैठे रहे और सरकार के खिलाफ नारेबाजी करती रहे।
35 से 40 प्रतिशत बढ़ाए जाएं वेतन : यूनियन के कनवीनर डॉ. कृष्णलाल गोंदवाल व प्रधान जसबीर सिंह ने बताया कि यह हड़ताल भारत सरकार के आईबीए के अड़ियल रुख के कारण की जा रही है। आईबीए द्वारा बैंक अधिकारी व कर्मचारियों के वेतन समझौते पर टालमटोल करना व वेतन वृद्धि हेतु आईबीए द्वारा मात्र 20 प्रतिशत वृद्धि प्रस्ताव करना आदि से परेशान है। उनकी मांग है कि सरकार 35 से 40 प्रतिशत बैंक अधिकारियों व कर्मचारियों की वेतन वृद्धि करे। बैंक कर्मचारियों व अधिकारियों का वेतन समझौते का शीघ्र हल करे। बैंक कर्मचारियों के वेतन हर पांच साल बाद देय तय हो। जोकि नवंबर 2017 से देय है। इसके अलावा बैंकों का करोड़ों रुपये ले रखा है, उनसे शीघ्र रिकवरी हो, बैंकों का विलय बंद हो, कर्मचारियों के उत्पीड़न को बनाए कानून पर रोक लगे और उन्हें रिटायरमेंट के सभी फायदे दिए जाएं।
हड़ताल देख लौटे उपभोक्ता:
हड़ताल के चलते उपभोक्ताओं को काफी परेशानी हुई। बैंकों पर ताले लगे देख वे बाहर से ही उल्टे पांव लौट गए। कुछ उपभोक्ता बैंक के इधर उधर चक्कर लगाते रहे। इस दौरान एटीएम बूथों पर उपभोक्ताओं की भीड़ लगी रही। देर शाम तक बूथों में भी कैश खाली हो गया।
बैंक उपभोक्ताओं परेशानी, उन्हीं की जुबानी :
फीस भरने के लिए भेजनी थी नकदी : आजादनगर की गली नंबर 14 निवासी सूरज ने बताया कि उसका भाई राहुल बनारस में बीटेक कर रहा है। उसके भाई को कॉलेज में दस हजार रुपये फीस जमा करवानी थी। इसके लिए उसने दस हजार रुपये भेजने थे। बुधवार को उसने पैसों का इंतजाम किया। इस नकदी को भाई को भेजने के लिए वह रेलवे रोड स्थित एसबीआई की मुख्य शाखा में पहुंचा, लेकिन यहां बैंक बंद था। अब वह किसी अन्य माध्यम से उसके पास पैसे भेजेंगे।
ऑपरेशन के लिए थी नकदी की जरूरत : जगाधरी अनाजमंडी स्थित एसबीआई की शाखा पर आए तीर्थ नगर निवासी रमेश शर्मा ने बताया कि उसके एक रिश्तेदार का पथरी का ऑपरेशन होना था। जिसके लिए उन्होंने उससे दस हजार रुपये मांगे थे। यह नकदी निकलवाने के लिए वह बैंक आया था। लेकिन यहां आकर पता चला बैंक में हड़ताल है।
नहीं मिली नकदी : भगवानपुर निवासी ईश्वर सिंह ने बताया कि उसने घरेलू कार्य के लिए कुछ नकदी की जरूरत थी, इसके लिए वह जगाधरी के एसबीआई में नकदी निकलवाने के लिए आया था। उसके पास एटीएम कार्ड नहीं है। लेकिन जब वह बैंक पहुंचा तो यहां कर्मचारी हड़ताल पर मिले।
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