स्टाफ की कमी से महिला थाने में धूल फांक रहीं छह स्कूटियां
- शहर के गर्ल्स कॉलेजों के आसपास थी गश्त की योजना, पांच माह से नहीं चढ़ पाई सिरे
अमर उजाला ब्यूरो
यमुनानगर। स्कूल-कॉलेज जाने वाली छात्राओं से छेड़छाड़ की घटनाओं को रोकने को आई स्कूटियों को महिला पुलिस राइडर्स नहीं मिल पाई। लाखों रुपये खर्च कर भेजी गईं सभी छह स्कूटियां महिला थाने में स्टाफ की कमी में धूल फांक रही हैं। इससे शहर में लड़कियों के शिक्षण संस्थानों पर स्कूटी राइडर्स द्वारा गश्त किए जाने की योजना पांच माह बाद भी सिरे नहीं चढ़ पाई है।
शहर के गर्ल्स स्कूलों व कॉलेजों के बाहर छात्राओं से छेड़छाड़ की घटनाओं पर खुद एसपी राजेश कालिया ने 16 दिसंबर 2017 को लड़कियों के शिक्षण संस्थाओं के बाहर छह स्कूटी राइडर्स से गश्त कराने की स्ट्रेटजी बनाई। इसके बाद योजना के तहत महिला थाने में छह स्कूटियां भी आई। योजना अच्छी थी, स्कूटी राइडर्स द्वारा गश्त की जाती तो सड़कों पर बाइक सवार मनचलों पर नकेल कसी जा सकती थी। इससे छेड़छाड़ की घटनाओं पर अंकुश लग सकता था।
स्टाफ की कमी में नहीं हो पा रही इस्तेमाल : अभी शहर में पीसीआर पर ही महिला पुलिस गश्त कर रही है। जबकि महिला थाना पुलिस की माने तो स्टाफ की कमी में गश्त के लिए स्कूटियों का इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है। ऐसे में स्कूटी राइडर्स से शहर के गर्ल्स स्कूलों व कॉलेजों के बाहर गश्त की योजना सिरे नहीं चढ़ पाई हैं।
यहां घूमते रहते हैं बाइकर्स : शहर की छोटी लाइन, एमएलएन कॉलेज रोड, नेहरू पार्क रोड व मॉडल टाउन के अन्य मार्गों पर छेड़छाड़ जैसी घटनाएं ज्यादा होती हैं। इस बात का अंदाजा कुछ माह पहले ऑपरेशन दुर्गा के तहत पकड़े गए मनचलों की संख्या को देखकर लगाया जा सकता है। इन्हीं मार्गों पर डीएवी गर्ल्स कॉलेज, गुरु नानक गर्ल्स स्कूल व कॉलेज, मुकंद लाल कॉलेज व अन्य कोचिंग सेंटर और शिक्षण संस्थान पड़ते हैं।
स्टाफ की कमी है। इससे महिला स्कूटी पर गश्त कम की जा रही है। ट्रेनिंग के बाद स्टाफ पूरा होते ही शहर में गश्त की जाएंगी।
-शीलावंती, एसएचओ, महिला थाना, यमुनानगर।
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