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प्ले स्कूल बनेंगी 25 हजार आंगनवाड़ी, एक लाख रुपए लेकर गोद देगी सरकार

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एक लाख रुपये नगद या सामान लेकर आंगनबाड़ी केंद्र को गोद देगी सरकार
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प्ले स्कूल के रूप में नजर आएंगे केंद्र, प्री नर्सरी की शिक्षा भी दी जाएगी
निरंजन कुमार राणा
यमुनानगर।
प्रदेश के 25 हजार आंगनबाड़ी केंद्र जल्द ही प्ले स्कूल के रूप में नजर आएंगे। प्ले स्कूलों की तर्ज पर बच्चों को प्री-नर्सरी की शिक्षा भी दी जाएगी। साथ ही मनोरंजन के लिए खिलौने भी उपलब्ध कराए जाएंगे। आंगनबाड़ी अडॉप्शन प्रोग्राम ‘हमारी फुलवारी’ स्कीम के तहत एक लाख रुपये नगद या जरूरत का सामान देकर आंगनबाड़ियों को गोद दिया जा सकेगा। कोई भी व्यक्ति, संस्था, कॉरपोरेट कंपनी या ग्राम पंचायत एक सेंटर को गोद ले सकते हैं। बदले में सरकार संबंधित व्यक्ति या संस्थान के नाम पर आंगनबाड़ी का नाम रखेगी और उसको डिस्प्ले भी किया जाएगा। महिला एवं बाल कल्याण विभाग द्वारा बाकायदा इसके लिए एग्रीमेंट करेगी। इस योजना को चलाने से पहले सोनीपत जिले में निजी क्षेत्र की एक कंपनी के माध्यम से ट्रायल भी लिया था। यह सफल होने के बाद इसे पूरे प्रदेश में लागू किया जा रहा है।

एक नजर में
-25 हजार आंगनबाड़ी है प्रदेश में।
-6 हजार आंगनबाड़ी खुद के भवन में।
-0 से 3 साल तक के 10 लाख बच्चे रजिस्टर्ड।
-खेल-खेल पढ़ना सीखेंगे बच्चे।
-इंग्लिश मीडियम पर दिया जाएगा जोर।

ये होगा खास
प्ले स्कूल की तरह सजाया जाएगा। बच्चों को आकर्षित करने वाली रंगीन दीवारें होंगी। इन पर ज्ञानवर्धक पेंटिंग होगी। दीवारों पर हिंदी वर्णमाला के अक्षर, अंग्रेजी वर्णमाला के लेटर के साथ कार्टून कैरेक्टर, पक्षी, फल, सब्जी, जानवरों के नाम सहित चित्रण होगा।
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इसलिए किया जा रहा है बदलाव
बाल अधिकार संरक्षण आयोग के सदस्य बाल कृष्ण गोयल ने बताया कि खस्ताहाल स्थिति को देखते हुए लोग अपने बच्चों को आंगनबाड़ी की जगह प्ले स्कूल में भेजना ज्यादा पसंद करते हैं। आंगनबाड़ी की गिरती साख को बचाने और बच्चों की दर्ज संख्या को बढ़ाने के लिए आयोग की तरफ से भी सरकार को बताया गया था। अब सरकार ने आंगनबाड़ी सेंटरों का कायाकल्प करने का निर्णय लिया। जो एक सराहनीय कदम है।

ये काम करवाने होंगे
गोद लेने वालों को आंगनबाड़ी केंद्रों की इमारतों को पूरा करने या उनका आंशिक निर्माण कराने, दीवारों पर बाल-अनुकूल चित्रकला कराने, भौतिक बुनियादी ढांचे का निर्माण या नवीकरण करवाकर सहयोग कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त वे बच्चों के अनुकूल शौचालय, कक्षा, 1 रसोईघर का निर्माण या नवीनीकरण, खेल उपकरण, सौर पैनल, जल संग्रहण, फर्नीचर, विद्युत फिटिंग, टीवी, पंखे, खाना बनाने, खिलौना बैंक, डिस्प्ले बोर्ड, कंप्यूटर युक्त कंप्यूटर प्रयोगशाला स्थापित करके सॉफ्टवेयर, प्रिंटर, स्कैनर, इंटरनेट और अन्य उपकरण लगाकर भी इन आंगनबाड़ी केंद्रों का योगदान किया जा सकता है।

एग्रीमेंट किया जाएगा
आंगनबाड़ी गोद लेने के लिए जिले के डब्ल्यूसीडीपीओ को आवेदन देना होगा। गोद लेने वाले और महिला एवं बाल विकास परियोजना अधिकारी के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया जाएगा। योगदानकर्ता द्वारा दी जाने वाली सहायता के प्रत्येक कार्य का विस्तृत विवरण दिया जाएगा और किस प्रकार का योगदान है, उसका भी उल्लेख किया जाएगा।

बदले में ये मिलेगा
दानकर्ता का नाम आंगनबाड़ी केंद्र में प्रदर्शित किया जाएगा और उसे महिला एवं बाल विकास परियोजना अधिकारी द्वारा प्रशंसा प्रमाण-पत्र जारी किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, जिला स्तर पर आधिकारिक कार्यक्रमों और कार्यों के लिए उन्हें विशेष निमंत्रण दिया जाएगा।
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प्रदेश की 25 हजार आंगनबाड़ियों को प्ले स्कूल की तरह चलाया जाएगा। एक लाख रुपये या सामान डोनेट करके पंचायत, पालिकाएं, व्यक्तिगत, कॉरपोरेट चयनित सेंटर को हमारी फुलवारी स्कीम के तहत अडॉप्ट कर सकता है। इस बारे में मुख्यमंत्री को प्रस्ताव भेजा था। इसे मुख्यमंत्री से स्वीकृति मिल गई है। हमारे आंगनबाड़ी सेंटर देशभर में सबसे आधुनिक होंगे।
-कविता जैन, महिला एवं बाल विकास मंत्री


फोटो नंबर 21, 22, 23, 24

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