नन्हे हाथों में वाहन : कटघरे में अभिभावक और अधिकारी
अमर उजाला ब्यूरो
यमुनानगर। नेशनल हाइवे पर स्कूली छात्र की डंपर की चपेट में आने से मौत के बाद न तो अभिभावकों ने सबक लिया है और न ही प्रशासन सचेत हुआ है। शहर से गुजरने वाले दोनों नेशनल हाइवे पर प्रतिदिन स्कूली नाबालिग छात्र-छात्राएं दुपहिया वाहन दौड़ाते नजर आ रहे हैं। स्कूली विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर बनाई गई सुरक्षित स्कूल वाहन पालिसी केवल कागजों में सिमट कर रह गई है।
यमुनानगर व जगाधरी शहर में दो नेशनल हाइवे गुजरते हैं। इन दोनों हाइवे से प्रतिदिन हजारों की संख्या में भारी वाहन गुजरते हैं। इसके अलावा शहर के वाहन भी इन हाइवे से होकर गुजरते हैं। टिवन सिटी में करीब सौ प्राइवेट स्कूल हैं। इन स्कूलों में पढ़ने वाले अधिकतर नाबालिग विद्यार्थी दुपिहया वाहनों से स्कूल आते हैं। इन विद्यार्थियों को किसी न किसी हाइवे से होकर गुजरना पड़ता है। शहर के दोनों हाइवे पर पिछले करीब एक साल से हादसों का ग्राफ बढ़ा है। ऐसे मेें सड़क से गुजरने वाले नौनिहालों की सुरक्षा को लेकर चिंतित होना लाजिमी है। इस मामले में न तो अभिभावक और न जिला प्रशासन संजीदा है।
साल 2012 में साहा में स्कूल वाहन हादसे के बाद स्कूली वाहन व बच्चों की सुरक्षा को लेकर काफी हो-हल्ला मचा। यह मामला माननीय हाइकोर्ट की चौखट पर पहुंचा तो हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार को सुरक्षित स्कूल वाहन पालिसी बनाकर स्कूली बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चत करने के निर्देश दिए। इसके बाद प्रदेश में सुरक्षित स्कूल वाहन पालिसी बनाई गई। इस पालिसी के तहत जिला स्तर के अलावा सब डिवीजन स्तर पर स्कूल प्रतिनिधियों, अभिभावकों व प्रशासनिक अधिकारियों की एसडीएम की अध्यक्षता में कम से कम तिमाही बैठक होनी चाहिए। सब डिवीजन स्तर पर एसडीएम इसके नोडल आफिसर होंगे। जिले में तीन सब डिवीजन है। जमीनी हकीकत यह है किसी भी सब डिवीजन में सुरक्षित स्कूल वाहन पालिसी की मीटिंग को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है।
चालान की राशि दोगुनी होने पर भी नाबालिगों के हाथों में वाहन
मोटर व्हीकल एक्ट के तहत 16 से 18 साल तक के युवा बिना गियर वाले दुपहिया वाहन ही चला सकते हैं। लेकिन सड़कों पर इस एक्ट की धज्जियां उड़ाई जा रही है। 16 साल से कम उम्र के स्कूली बच्चे बिना गियर वाले दुपहिया वाहन स्पीड से दौड़ाते नजर आते हैं। वहीं, 18 साल से कम उम्र के बच्चें सड़कों पर बिना रोक-टोक स्टायलिस्ट बाइक चला रहे हैं। कुछ समय पहले मोटर व्हीकल एक्ट में संशोधन किया गया है। इसमें यदि कोई नाबालिग वाहन चलाते पकड़ा गया तो चालान की राशि को दुगना कर दिया गया है। इसके बावजूद ट्विन सिटी में नाबालिग स्कूली बच्चों के दुपहिया वाहन लेकर सड़कों पर निकलने में कोई कमी नहीं आई है।
सुरक्षित स्कूल वाहन पालिसी की मीटिंग को लेकर क्या कहते हैं अधिकारी
सुरक्षित स्कूल वाहन पॉलिसी की मीटिंग जिला स्तर पर होती है। यदि पॉलिसी के तहत खंड स्तर पर मीटिंग अनिवार्य है तो कपालमोचन मेले के बाद मीटिंग रख लेंगे।
नवीन आहूजा, एसडीएम बिलासपुर
-समय को बचाने के लिए सुरक्षित स्कूल वाहन पालिसी की मीटिंग एक बार एक ही स्थान पर रख ली जाती है, जिसमें सभी एसडीएम, प्रशासनिक अधिकारी व स्कूल प्रतिनिधियों को बुलाया जाता है। जहां तक नाबालिग बच्चों द्वारा स्कूल में वाहन लेकर आने की बात है, इसका चार्ज एडीसी के पास है।
भारतभूषण कौशिक, एसडीएम जगाधरी
सब डिवीजन स्तर पर सुरक्षित स्कूल वाहन पॉलिसी के तहत मीटिंग भले ही नहीं हुई है। लेकिन मैने चार्ज संभालते ही स्कूली बच्चों की सुरक्षा पर ध्यान दिया है। स्कूल संचालकों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने स्कूल वाहनों की कमियों को सुधारें। स्कूल संचालकों को निर्देश दिए गए है कि वे नाबालिग बच्चों को वाहन लाने से रोके।
डॉ पूजा भारती, एसडीएम रादौर
मोटर व्हीकल एक्ट में संशोधन के बाद दुपहिया वाहन चलाने वाले करीब 90 नाबालिग बच्चों के चालान काटे गए हैं। दुपहिया वाहन चलाने वाले नाबालिगों को पकड़ने के लिए पुलिस पीछा करती है तो एक्सीडेंट का खतरा बना रहता है। अभिभावकों का भी फर्ज है कि वे अपने नाबालिग बच्चों को वाहन लेकर स्कूल न आने दें। ट्रैफिक पुलिस की ओर से स्कूलों में कैंप लगाकर स्कूली बच्चों को वाहन लेकर स्कूल न आने के लिए जागरूक किया जाएगा।
निर्मल सिंह, ट्रैफिक इंस्पेक्टर