सूनी रहीं सड़कें, बाजाराें में पसरा रहा सन्नाटा
अमर उजाला ब्यूरो
यमुनानगर। डेरा सच्चा सौदा प्रमुख को सजा को लेकर सोमवार को एहतियातन लोग घरों में कैद रहे, बहुत जरूरी होने पर ही लोग घरों से बाहर निकले। इससे आमतौर पर सड़कें सूनी ही रहीं। इसका असर बाजारों में भी दिखा। बाजारों में सन्नाटा पसरा रहा। फिलहाल जिले में शांति बरकरार रही। इससे पहले किसी अप्रिय घटना से निपटने के लिए पुलिस प्रशासन ने तैयारी की थी। पुलिस ने फ्लैग मार्च किया था, जिन स्थानों पर डेरा समर्थकों की संख्या अधिक बताई जाती है, वहां पुलिस निगहबानी कर रही थी। जिले में डेरा समर्थकों की संख्या करीब 10 हजार बताई जाती है। इधर, डेरा प्रमुख को रेप के दो मामलों में अलग-अलग 10-10 साल की सजा सुनाए जाने (कुल 20 साल) से डेरा समर्थक निराश हैं, जबकि पीड़ित पक्ष ने न्याय मिलने से संतोष जाहिर किया है।
अब तक रोडवेज को 70 लाख की चपत, आज चल सकती हैं बसें
डेरा प्रमुख मामले को लेकर रोडवेज बसें न चलने से रोडवेज को अब तक करीब 70 लाख रुपये का नुकसान हो चुका है। रोडवेज अधिकारियों के मुताबिक मंगलवार को रोडवेज बस चलने की उम्मीद है। डेरा प्रमुख को गत 25 अगस्त को पंचकुला की सीबीआई कोर्ट में सजा सुनाई जानी थी। इसके मद्देनजर जिले में 24 अगस्त दोपहर बाद से ही रोडवेज बसों का संचालन बंद कर दिया गया था। अधिकारियों के मुताबिक रोडवेज को प्रतिदिन करीब 15 लाख की आय होती है। इस लिहाज से 28 अगस्त तक रोडवेज को करीब 70 लाख रुपये का नुकसान हो चुका है। जीएम रोडवेज रविंद्र पाठक ने बताया कि फिलहाल रोडवेज बसें चलाए जाने को कोई आदेश नहीं आया है। लेकिन मौजूद हालात को देखते हुए मंगलवार से बसें चलने की उम्मीद है।
यमुनानगर में साप्ताहिक बंदी, जगाधरी में खुली रहीं दुकानें
डेरा प्रमुख को सजा सुनाए जाने के बाद भी जिले में शांति बरकरार रही। इसे देखते हुए जिले में अधिकतर स्थानों पर दुकानें खुली रहीं, जगाधरी शहर में सुबह कुछ दुकानें बंद थीं, लेकिन फैसला आने के बाद बंद दुकानों के शटर भी उठ गए। वहीं, यमुनानगर में सोमवार को साप्ताहिक बंदी होती है। इस कारण यहां सुबह से ही बाजार बंद थे। सड़कों और बाजारों में आज सन्नाटा पसरा रहा।
बिलासपुर में हुई वाहनों की चेकिंग, फोर्स ने निकाला फ्लैग मार्च
बिलासपुर। डेरा प्रमुख को यौन शोषण मामले में सजा सुनाए जाने केे बाद क्षेत्र के डेरा समर्थकों में मायूसी है। वहीं, शांति व्यवस्था को बनाए रखने के लिए प्रशासन व पुलिस प्रशासन मुस्तैद रहा। कस्बा बिलासपुर के शिव चौक, अग्रसैन चौक, कपाल मोचन मुख्य मार्ग, साढौरा मुख्य मार्ग व छछरौली रोड पर पुलिस ने चौकसी बढ़ा कर बाहर से आने वाले वाहनों की गहनता से जांच की। एसडीएम बिलासपुर नवीन आहूजा ने उपमंडल के अंतर्गत आने वाले थानाध्यक्षों व प्रशासनिक अधिकारियों की आपात मीटिंग ली और सुरक्षा को लेकर दिशा निर्देश दिए। जिन गांवों में डेरा प्रेमियों की संख्या अधिक है। वहां पर कड़ी नजर रखी जा रही है। साथ ही डेरा समर्थकों से शांति बनाए रखने की अपील भी की जा रही है। मीटिंग के बाद उपमंडल के अधिकारियों और पुलिस प्रशासन ने डीएसपी रणधीर सिंह व एसएचओ बिलासपुर दीदार सिंह की अगुवाई में फ्लैग मार्च निकाला। यह डीएसपी कार्यालय बिलासपुर से शुरू होकर छछरौली, खिदराबाद, लेदी, रणजीतपुर, साढौरा व थाना छप्पर में विभिन्न गांवों में निकाला गया।
सजा सुनते ही डेरा समर्थकों के चेहरे मुरझाए, कई घरों में नहीं जले चूल्हे
रादौर। सीबीआई कोर्ट की ओर से डेरा प्रमुख को सोमवार को सजा सुनाए जाने के दौरान रादौर क्षेत्र के डेरा समर्थकों के चेहरे मुरझा गए हैं। उधर, मामले को लेकर प्रशासन की ओर से सुरक्षा के रादौर में कडे़ प्रबंध किए गए। प्रशासन की ओर से भारी पुलिस बल ने मंगलवार को रादौर में फ्लैग मार्च किया। थाना रादौर प्रभारी बलराज सिंह के नेतृत्व में पुलिस के जवान दिन रात सड़कों पर गश्त करते नजर आए। रादौर में कहीं से भी किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं है। इक्का दुक्का डेरा समर्थक कहीं-कहीं नजर आए। गौरतलब है कि जिले के रादौर क्षेत्र में सबसे ज्यादा डेरा समर्थक हैं, जबसे रादौर में नामचर्चा घर को प्रशासन ने सील किया है। तब से डेरा समर्थक अज्ञात स्थानों पर अपनी बैठकें कर रहे हैं। सोमवार को डेरा प्रमुख को सजा सुनाने के बाद तमाम डेरा समर्थकों के घर चूल्हे नहीं जले। बहुत से समर्थकों को रोते देखा गया। रादौर प्रभारी बलराज सिंह ने बताया कि मामले को लेकर क्षेत्र में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई है। किसी को भी कानून हाथ में नहीं लेने दिया जाएगा। क्षेत्र में स्थिति शांतिपूर्वक है। कहीं से भी कसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं है।