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जीएसटी का असर : एक महीने बाद भी उत्पादन आधा, अगस्त में सुधार की उम्मीद

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एक महीने बाद भी उत्पादन आधा, अगस्त में सुधार की उम्मीद
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अमर उजाला ब्यूरो
यमुनानगर। प्लाइवुड पर 28 प्रतिशत जीएसटी लगने के एक माह बाद भी प्लाइवुड इंडस्ट्री से मंदी के बादल नहीं छंट पाए हैं। इसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ रहा है। जीएसटी से पहले इन फैक्ट्रियों में प्रतिदिन औसत 10 करोड़ का माल तैयार होता था, जबकि अब उत्पादन लगभग आधा रह गया है। बाजार के जो हालात हैं, उसे देखते हुए फैक्टरी मालिक अगस्त मेें थोड़ा सुधार आने की उम्मीद कर रहे हैं। उधर, फैक्ट्रियों में उत्पादन कम होने से इनसे सरकार को मिलने वाले टैक्स में भी भारी कमी आई है। उत्पादन आधा होने से टैक्स भी आधा रह गया है।
देशभर में भेजा जाता है प्लाई
जिले की प्लाइवुड इंडस्ट्री में तैयार प्लाई और बोर्ड देश भर में भेजा जाता है। जीएसटी से पहले इन फैक्ट्रियों में 24 घंटे उत्पादन होता था, लेकिन अब लगभग सभी फैक्ट्री में एक शिफ्ट में ही उत्पादन हो रहा है। जुलाई के पहले हफ्ते में तो उत्पादन 70 प्रतिशत तक गिर गया था। प्लाइवुड पर 28 प्रतिशत जीएसटी के विरोध में 14 से 17 जुलाई तक जिले के अलावा देश भर की प्लाइवुड फैक्ट्री में हड़ताल रही। हड़ताल समाप्त होने के बाद भी उत्पादन में बढोतरी नहीं हुई। हालांकि जुलाई के अंतिम सप्ताह में उत्पादन थोड़ा बढ़ा है। इसे देखते हुए प्लाई निर्माता अगस्त में सुधार की उम्मीद कर रहे हैं।
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दुकानदार कर रहे स्टाक की सेल
प्लाई निर्माताओं की मानें तो जीएसटी लगने से पहले दुकानदारों ने काफी माल स्टाक कर लिया था। जीएसटी लगने के बाद आर्डर आने लगभग बंद हो गए। एक महीने तक दुकानदार स्टाक को सेल करते रहे। अब उनके पास भी माल लगभग समाप्त होने लगा है। ऐसे में उम्मीद है कि अगस्त में आर्डर आने लगेंगे।
टैक्स बढ़ने से नहीं निकल रही डिमांड
जीएसटी लागू होने से पहले प्लाइवुड पर साढे़ बारह प्रतिशत एक्साइज लगता था। इसके बाद जिस राज्य में माल जाता था, वहां वैट टैक्स अलग से लगता था। जिन राज्यों में वैट की दर पांच प्रतिशत थी, वहां करीब साढे़ सत्रह प्रतिशत टैक्स लगता था। अब उन राज्यों में भी ग्राहकों को 28 प्रतिशत टैक्स देना पड़ रहा है। इसके चलते भी प्लाई की डिमांड कम हुई है।
घर लौट गए श्रमिक..
जिले में प्लाइवुड की करीब 350 और पिलिंग की करीब 250 फैक्ट्री हैं। इन फैक्ट्रियों में हजारों की संख्या में श्रमिक काम करते हैं। जीएसटी लगने के बाद फैक्ट्रियों में उत्पादन घटने से श्रमिकों की संख्या भी लगभग आधी कर दी गई है। बाहरी राज्यों के अधिकतर श्रमिक घर लौट गए हैं, जबकि कुछ यही पर रहकर उत्पादन बढ़ने का इंतजार कर रहे हैं।
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प्लाइवुड पर 28 प्रतिशत टैक्स बहुत अधिक है। इस कारण तैयार माल की डिमांड कम हो गई है। जुलाई के अंतिम सप्ताह में थोड़ी डिमांड निकली है। उम्मीद है कि अगस्त तक डिमांड और बढ़ेगी।जुगल किशोर भयाणी, महासचिव, हरियाणा प्लाइवुड मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन
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