उपमंडलाधीश सतीश कुमार ने हरियाणा के सिरसा जिले के उपमंडल डबवाली क्षेत्र में सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता परखने के लिए एक अभियान की शुरूआत की है।
उन्होंने स्कूलों का निरीक्षण कर कक्षाओं में जाकर बच्चों से रू-ब-रू होना शुरू कर दिया है।
अभियान की शुरूआत गांव डबवाली से हुई। गांव डबवाली की राजकीय प्राथमिक पाठशाला में पहुंचे।
उन्होंने पंाचवीं कक्षा के विद्यार्थियों की उत्तर पुस्तिकाएं (कॉपियां) चेक कीं। वे देखकर हैरान थे कि बच्चों को लिखना तक नहीं आ रहा था।
यहां तक कि बच्चे हिंदी में अपना नाम तक सही नहीं लिख पा रहे थे। पिछली पास की गई कक्षाओं से संबंधित पाठ्य सामग्री में से पूछे गए प्रश्नों के उत्तर भी विद्यार्थी नहीं दे पाए।
उपमंडलाधीश को शिक्षा की दुर्गति पर हैरानी हुई। उन्होंने संबंधित अध्यापकों को आवश्यक दिशा-निर्देश देकर विद्यार्थियों का शिक्षा स्तर सुधारने के लिए कहा।
यह कैसी पढ़ाई?
उपमंडलाधीश सतीश कुमार गांव मांगेआना के सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल में पहुंचे। छठीं कक्षा के बच्चों से मुलाकात की।
उनकी उत्तर पुस्तिकाएं जांचीं और वहां भी बच्चों की स्थिति गांव डबवाली के प्राइमरी स्कूल जैसी मिलीं। बच्चों से ब्लैक बोर्ड पर लिखवाकर देखा गया, लेकिन बच्चे अंग्रेजी वर्णमाला तक नहीं लिख पाए।
हिंदी वर्णमाला तो दूर की बात रही, विद्यार्थी अपना नाम तक सही नहीं लिख सके। इसके बाद उन्होंने बारहवीं कक्षा में प्रवेश किया।
विद्यार्थियों का सामान्य ज्ञान जानकर तो और भी हैरानी हुई कि विद्यार्थियों को अपने विधायक, राज्यपाल, उपायुक्त, सांसद के नाम तक मालूम नहीं थे।
पचास बच्चों में से सिर्फ दो ने ही समाचार पत्र पढ़ने के लिए हाथ खड़ा किया। उपमंडलाधीश ने दो घंटे मांगेआना स्कूल में बिताए। उन्होंने अध्यापकों से बच्चों का शिक्षा स्तर निम्न होने पर निर्देश जारी किए।
सरकार को भेजी जाएगी रिपोर्ट
एसडीएम सतीश कुमार ने बताया कि सरकारी स्कूलों में शिक्षा का स्तर बहुत निम्न है। स्कूलों में जाकर वे इस बात का पता लगा रहे हैं कि बच्चों को गुणवत्ता युक्त शिक्षा किस प्रकार मिले।
शिक्षा के स्तर में जो गिरावट आ रही है, उसे कैसे दूर किया जा सके। शुक्रवार को उन्हाेंने स्कूलाें में क्या देखा के नाम पर एक डायरी बनाई है, जिसमें स्कूल के निरीक्षण के दौरान मिलने वाली खामियों को नोट करते हैं।
इन खामियों को वे उच्च अधिकारियों को भेजेंगे ताकि व्यवस्था में सुधार हो सके। वे निरीक्षण किए गए स्कूलों का फिर से दौरा करेंगे। फिर भी शिक्षा के स्तर में सुधार नहीं मिला तो संबंधित स्कूल स्टॉफ पर कार्रवाई की जाएगी।